चुनाव आयोग में प्रकाश राजपुरोहित बने उप चुनाव आयुक्त: फॉर्म-7 थोक विलोपन पर लगी रोक, ECINet सॉफ्टवेयर का होगा साइबर सुरक्षा ऑडिट

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Election Commission of India Nirvachan Sadan digital operations center with voter analytics

नई दिल्ली (निर्वाचन व प्रशासनिक डेस्क): मतदाता सूचियों में कथित विलोपन और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश की चुनावी प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, हाई-टेक और फुलप्रूफ बनाने के लिए आज 14 अक्टूबर 2026 को बहुत बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत कदम उठाया है। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को निर्वाचन सदन में नया उप चुनाव आयुक्त (Deputy Election Commissioner – DEC) आधिकारिक तौर पर नियुक्त कर दिया है। पदभार संभालते ही नए उप चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूची से नाम कटवाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विवादित ‘फॉर्म-7’ के थोक विलोपन (Bulk Form-7 Submissions) पर तत्काल प्रभाव से सख्त कैप (दैनिक सीमा) लगाने का ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही आयोग के पूरे डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ECINet का उच्च स्तरीय साइबर सुरक्षा ऑडिट शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।

📌 चुनाव आयोग के नए सख्त नियम: मुख्य बदलाव और प्रावधान (Key Highlights)

  • प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति: वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को आईटी, मतदाता सूची अपडेशन और चुनावी सुधारों का प्रभार
  • थोक फॉर्म-7 पर पूर्ण प्रतिबंध: अब कोई भी व्यक्ति या संस्था एक दिन में अधिकतम 3 से अधिक फॉर्म-7 ऑनलाइन जमा नहीं कर सकेगी
  • अनिवार्य बायोमेट्रिक व आधार ओटीपी: आपत्ति दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता का लाइव फेशियल या आधार ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य
  • घर जाकर अनिवार्य भौतिक जांच: किसी भी वोटर का नाम काटने से पहले बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को घर जाकर जियो-टैग्ड जांच करनी होगी
  • ECINet साइबर सिक्योरिटी ऑडिट: CERT-In और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी द्वारा चुनाव आयोग के पूरे सॉफ्टवेयर की जांच शुरू
  • लापरवाह अधिकारियों पर कानूनी गाज: बिना प्रक्रिया पूरी किए नाम काटने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीधे निलंबन और विभागीय केस

Election Commission Major Action: प्रकाश राजपुरोहित बने नए उप चुनाव आयुक्त, संभाला पदभार

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को चुनाव प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल गवर्नेंस का लंबा और बेदाग अनुभव रहा है। निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों की उपस्थिति में उन्होंने आज औपचारिक रूप से उप चुनाव आयुक्त का कार्यभार संभाला।

उन्हें देश भर में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण, आईटी अनुप्रयोगों (Voter Helpline App, ERO-Net 2.0) और आगामी 2026-27 के सभी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी तैयारियों की केंद्रीय कमान सौंपी गई है। पद संभालते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि चुनावी प्रक्रिया में ‘जीरो-एरर’ (Zero Error) की नीति अपनाई जाएगी और किसी भी असली भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से अन्यायपूर्ण तरीके से नहीं हटने दिया जाएगा।

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Strict Cap on Bulk Form-7: वोटर लिस्ट से थोक में नाम कटवाने की फर्जी शिकायतों पर चुनाव आयोग की रोक

चुनाव आयोग के नियमों में फॉर्म-7 (Form-7) का इस्तेमाल किसी मतदाता के निधन होने, स्थायी रूप से शहर छोड़कर चले जाने या दोहरी प्रविष्टि होने पर उसका नाम मतदाता सूची से हटाने की आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। लेकिन हाल के दिनों में ऐसी शिकायतें आई थीं कि कुछ राजनीतिक शरारती तत्वों और फर्जी साइबर दलालों ने ऑटोमेटेड बॉट्स या एक ही आईपी एड्रेस से सैकड़ों वास्तविक मतदाताओं के नाम काटने के लिए थोक में फॉर्म-7 भर दिए थे।

इस फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए चुनाव आयोग ने आज से सिस्टम में तकनीकी ताला लगा दिया है। अब कोई भी यूजर एक दिन में एक मोबाइल नंबर और एक आईपी एड्रेस से अधिकतम 3 से ज्यादा फॉर्म-7 सबमिट नहीं कर सकेगा। यदि कोई इससे ज्यादा फॉर्म भरने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा और उस आईपी को साइबर सेल की निगरानी में डाल दिया जाएगा।

Election Commission of India Nirvachan Sadan Cyber Digital Security
तस्वीर: निर्वाचन सदन (नई दिल्ली) में चुनाव आयोग का केंद्रीय साइबर ऑपरेशन सेंटर और डिजिटल ऑडिट यूनिट

Mandatory OTP and Physical Verification: अब किसी का नाम काटने से पहले घर जाकर होगी जांच

नए आदेश के तहत किसी का नाम हटाने की प्रक्रिया को बेहद कड़ा और त्रि-स्तरीय (Three-Tier) बना दिया गया है:

  • शिकायतकर्ता की आधार पहचान: फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति को अपना आधार नंबर और ओटीपी देना होगा, ताकि पता रहे कि आपत्ति किसने दर्ज कराई है। झूठी शिकायत करने पर धारा 31 के तहत जेल होगी।
  • बीएलओ का अनिवार्य डोर-टू-डोर दौरा: आपत्ति मिलने के बाद संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को खुद उस मतदाता के घर जाना होगा और परिवार के सदस्यों या पड़ोसियों के बयान लेने होंगे।
  • जियो-टैग्ड फोटो अपलोड: बीएलओ को अपने ‘बीएलओ ऐप’ से उस घर के सामने खड़े होकर अक्षांश-देशांतर (GPS Lat-Long) के साथ लाइव तस्वीर अपलोड करनी होगी, ताकि यह साबित हो सके कि बीएलओ वास्तव में मौके पर गया था।
  • मतदाता को रजिस्टर्ड नोटिस: अंतिम निर्णय से पहले संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा उस वोटर को 15 दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।

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ECINet Cybersecurity Audit: 2026-27 के आगामी चुनावों से पहले डिजिटल पोर्टल की सुरक्षा जांच

विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए तकनीकी सवालों और साइबर हमलों के वैश्विक खतरों को देखते हुए आयोग ने अपने मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet 2.0 का व्यापक फॉरेंसिक सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। यह ऑडिट भारत सरकार की नोडल साइबर एजेंसी सर्ट-इन (CERT-In) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है।

ऑडिट में यह परखा जाएगा कि क्या सिस्टम में कोई बैकडोर या सुरक्षा खामी (Vulnerability) तो नहीं है जिससे डेटाबेस में अनधिकृत छेड़छाड़ की जा सके। इसके साथ ही डेटाबेस में किसी भी बदलाव का टाइम-स्टैम्प और एडमिनिस्ट्रेटर लॉग हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा ताकि किसी भी स्तर पर की गई हेराफेरी पकड़ी जा सके।

How to Check Your Name in Voter List: वोटर हेल्पलाइन ऐप पर अपना नाम कैसे चेक करें?

चुनाव आयोग ने सभी देशवासियों से अपील की है कि वे समय-समय पर मतदाता सूची में अपना नाम खुद चेक करते रहें। इसके लिए घर बैठे 2 मिनट में निम्नलिखित तरीके से जांच की जा सकती है:

1. अपने स्मार्टफोन में गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से आधिकारिक Voter Helpline App डाउनलोड करें या electoralsearch.eci.gov.in वेबसाइट खोलें।
2. ‘Search in Electoral Roll’ विकल्प पर क्लिक करें।
3. आप तीन आसान तरीकों से खोज सकते हैं: (a) अपना 10 अंकों का वोटर आईडी कार्ड (EPIC) नंबर डालकर, (b) अपना नाम, पिता का नाम, उम्र और राज्य डालकर, या (c) अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के जरिए।
4. यदि आपका नाम, पोलिंग स्टेशन और भाग संख्या स्क्रीन पर दिखाई दे रही है, तो आपका नाम 100% सुरक्षित है। यदि कोई विसंगति दिखे, तो तुरंत ऐप से ही फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने) या फॉर्म-8 (संशोधन) भर सकते हैं।

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BLO Accountability & Penalties: गलत तरीके से नाम काटने वाले अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई

आयोग के नए परिपत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि जो भी बीएलओ या ईआरओ बिना मौके पर जाए टेबल पर बैठकर किसी नागरिक का नाम सूची से हटाएगा, उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, जिसमें 2 साल तक की जेल और नौकरी से बर्खास्तगी की सजा का प्रावधान है।

चुनाव आयोग के इन त्वरित और कड़े कदमों से आगामी चुनावों में मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता पर उठ रहे सभी सवालों पर विराम लगने और लोकतांत्रिक व्यवस्था के और अधिक मजबूत होने की पूरी उम्मीद है।

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