कैंसर मरीजों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 137 जीवनरक्षक दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% पर सीमित, 1 नवंबर से 50% से 80% तक सस्ती होंगी दवाएं

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Government briefing on reducing prices of 137 cancer medicines by 30 percent trade margin

नई दिल्ली (पॉलिटिक्स व हेल्थ वेलफेयर डेस्क): देश के लाखों कैंसर पीड़ितों और उनके परिवारों को इलाज के भारी-भरकम वित्तीय बोझ से ऐतिहासिक राहत देते हुए केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने एक क्रांतिकारी नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने जनहित में अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं के ट्रेड मार्जिन (व्यापारिक मुनाफे) को अधिकतम 30 प्रतिशत पर कैप (सीमित) कर दिया है। 1 नवंबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी होने वाले इस आदेश के बाद कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, और टार्गेटेड ऑन्कोलॉजी दवाओं की खुदरा एमआरपी (MRP) में 50% से लेकर 85% तक की भारी गिरावट आएगी, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को कैंसर के महंगे इलाज में लाखों रुपये की सीधी बचत होगी।

ट्रेड मार्जिन युक्तिकरण (TMR) क्या है और कैसे लूटे जा रहे थे मरीज?

कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के इलाज में सबसे बड़ा संकट दवाओं की आसमान छूती कीमतें रही हैं। कई जांच रिपोर्टों और संसदीय समितियों के अध्ययनों में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया था कि दवा निर्माता कंपनियां जिस कैंसर रोधी इंजेक्शन या दवा को ₹1,000 की लागत में बनाती थीं, उस पर अस्पताल, थोक व्यापारी और फार्मेसी डिस्ट्रीब्यूटर्स 400% से लेकर 1,000% तक का भारी-भरकम ट्रेड मार्जिन जोड़कर मरीजों को ₹10,000 से ₹15,000 की एमआरपी पर बेच रहे थे।

मरीज और उनके परिजन अस्पताल के बिलों को चुकाने के लिए अपनी जमीनें, जेवर और जीवन भर की बचत बेचने को मजबूर हो जाते थे। सरकार ने इस शोषणकारी मुनाफे पर अंकुश लगाने के लिए ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 (DPCO) के पैरा 19 के तहत प्रदत्त विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए ‘ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन’ (Trade Margin Rationalization – TMR) का फॉर्मूला लागू किया है। इसके तहत दवा कंपनी जिस कीमत पर दवा डिस्ट्रीब्यूटर को बेचती है (Price to Stockist – PTS), उस पर खुदरा बिक्री तक सभी बिचौलियों का कुल मुनाफा मिलाकर अधिकतम 30% से ज्यादा नहीं हो सकता।

कौन-कौन सी दवाएं होंगी सस्ती? 137 दवाओं की सूची में क्या शामिल है?

एनपीपीए द्वारा अधिसूचित 137 कैंसर रोधी दवाओं की सूची में वे सभी प्रमुख दवाएं और इंजेक्शन शामिल हैं जिनका उपयोग भारत में सबसे आम कैंसरों के इलाज में प्रतिदिन किया जाता है:

1. स्तन कैंसर (Breast Cancer) की दवाएं: ट्रैस्टुजुमाब (Trastuzumab), पैक्लिटैक्सेल (Paclitaxel), डोकेटेक्सेल, और टैमोक्सीफेन जैसी दवाओं की कीमतों में 60% से 75% तक की कमी आएगी। जो इंजेक्शन पहले ₹45,000 में मिलता था, वह अब ₹12,000 से ₹15,000 के दायरे में आ जाएगा।
2. फेफड़े और पेट के कैंसर (Lung & Colon Cancer): पेमब्रोलीजुमाब, इरिनोटेकन, ऑक्सिप्लेटिन और जेम्सिटाबाइन जैसी जीवनरक्षक दवाओं की एमआरपी में 50% से 80% तक की भारी कटौती होगी।
3. ब्लड कैंसर व ल्यूकेमिया (Leukemia & Lymphoma): इमैटिनिब (Imatinib), रिटुक्सिमैब (Rituximab) और बोरटेजोमिब जैसी लक्षित दवाओं की कीमतें आम आदमी की पहुंच के भीतर आ जाएंगी।
4. प्रोस्टेट और सर्वाइकल कैंसर: ल्यूप्रोलाइड एसीटेट और सिस्प्लैटिन जैसी आवश्यक दवाओं पर भी 30% का मार्जिन कैप लागू होगा।

1 नवंबर से कैसे लागू होगा नया नियम? अस्पतालों के लिए सख्त आदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी दवा निर्माताओं, आयातकों, अस्पतालों और रिटेल केमिस्ट्स को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे 1 नवंबर 2026 से पहले अपनी सभी 137 कैंसर दवाओं की संशोधित एमआरपी की सूची एनपीपीए के ऑनलाइन डेटाबेस ‘IPDMS’ पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें और इसे राज्य औषधि नियंत्रकों (State Drug Controllers) के साथ साझा करें:

निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों को अपने फार्मेसी काउंटरों पर संशोधित मूल्य सूची को स्पष्ट अक्षरों में प्रदर्शित करना होगा। यदि कोई भी निजी अस्पताल या केमिस्ट 1 नवंबर के बाद किसी मरीज से पुराने रेट पर या 30% से अधिक मार्जिन जोड़कर दवा बेचता हुआ पाया गया, तो आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और अधिक वसूली गई पूरी रकम 18% ब्याज के साथ सरकार द्वारा जब्त कर ली जाएगी।

‘आयुष्मान भारत’ और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को मिलेगा बड़ा संबल

स्वास्थ्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार सरकार के इस फैसले से न केवल निजी रूप से इलाज कराने वाले मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) को भी जबरदस्त वित्तीय मजबूती मिलेगी। आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है, जिसमें कैंसर का इलाज सबसे महंगा पैकेज माना जाता है।

दवाओं की कीमतें 60% तक कम होने से सरकारी खजाने पर पैकेज का बोझ घटेगा, जिससे सरकार उसी बजट में दोगुने गरीब मरीजों को मुफ्त कीमोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा सकेगी। इसके अलावा देश भर में संचालित 10,000 से अधिक ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों’ पर भी इन कैंसर रोधी दवाओं की उपलब्धता को तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

मरीजों और परिजनों के लिए हेल्पलाइन और शिकायत निवारण तंत्र

यदि 1 नवंबर के बाद किसी मरीज को किसी अस्पताल या मेडिकल स्टोर पर कैंसर की दवा एमआरपी से अधिक पर बेची जाती है, या अस्पताल बाहर की सस्ती जेनेरिक दवा लेने से मना करता है, तो मरीज सीधे राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-111-255 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा एनपीपीए के ऑनलाइन ग्रीवेंस पोर्टल ‘Pharma Sahi Daam’ ऐप के माध्यम से दवा के बैच नंबर और बिल की फोटो अपलोड करके तुरंत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिस पर 48 घंटे के भीतर औषधि निरीक्षकों द्वारा कार्रवाई की जाएगी।

कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से जूझ रहे करोड़ों परिवारों के लिए यह फैसला केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक नई उम्मीद और सम्बल है। केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों, स्वास्थ्य सुधारों और राष्ट्रीय फैसलों की विस्तृत व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए हमारे पॉलिटिक्स एवं राष्ट्रीय मामले सेक्शन के साथ बने रहें।

Government Health Welfare Cabinet Meeting Anti Cancer Medicine Price Cap
तस्वीर: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जनहितैषी स्वास्थ्य नीतियों और मूल्य नियंत्रण का अनुमोदन

दवा कंपनियों की प्रतिक्रिया और बाजार में उपलब्धता की गारंटी

सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस (IPA) और प्रमुख दवा निर्माता कंपनियों ने इस नीतिगत कदम का स्वागत किया है। हालांकि कुछ विदेशी दवा कंपनियों ने यह आशंका जताई थी कि मार्जिन कम होने से क्या उन्नत पेटेंटेड दवाओं का भारत में आयात प्रभावित होगा? इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ट्रेड मार्जिन कैप केवल बिचौलियों और बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों के अत्यधिक मुनाफे को रोकता है, दवा कंपनियों के मूल अनुसंधान और उत्पादन मूल्य (Price to Stockist) पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

सरकार ने सभी दवा नियंत्रकों को यह सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर या केमिस्ट दवाओं की कृत्रिम किल्लत (Artificial Shortage) पैदा न करे। यदि किसी आवश्यक कैंसर रोधी दवा की जमाखोरी की गई, तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

भारत में कैंसर नियंत्रण की दिशा में एक समग्र रोडमैप

सस्ती दवाओं के अलावा भारत सरकार ने देश भर में कैंसर की शीघ्र पहचान (Early Detection) के लिए ‘राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम अभियान’ को तेज कर दिया है। देश के विभिन्न जिला अस्पतालों में मैमोग्राफी और सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की निशुल्क सुविधाएं शुरू की गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब दवाएं सस्ती होंगी और बीमारी पहली या दूसरी स्टेज में पकड़ में आ जाएगी, तो देश में कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में 40% से अधिक की कमी लाई जा सकेगी। यह फैसला भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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