नई दिल्ली (टेक व साइबर डेस्क): सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए फर्जी वीडियो, आवाज की नकल और डीपफेक के जरिए बढ़ती धोखाधड़ी और मानहानि की घटनाओं पर केंद्र सरकार ने सबसे बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। आज 14 अक्टूबर 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम 2026 आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी एआई-जनरेटेड इमेज, ऑडियो या वीडियो पर अपरिवर्तनीय क्रिप्टोग्राफिक वॉटरमार्क (Tamper-Proof Watermark) लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक डीपफेक की शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर उसे इंटरनेट से पूरी तरह हटाना होगा, वर्ना कंपनियों को अपनी कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour Protection) से हाथ धोना पड़ेगा।
📌 नए AI डीपफेक नियम 2026: मुख्य बातें और सख्त प्रावधान (Key Highlights)
- अनिवार्य वॉटरमार्क लेबल: हर एआई टूल और क्रिएटर को कंटेंट पर स्पष्ट विजुअल लेबल और डिजिटल क्रिप्टोग्राफिक मेटाडेटा लगाना होगा
- 24 घंटे का सख्त अल्टीमेटम: शिकायत दर्ज होते ही फेसबुक, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम को 24 घंटे में डीपफेक हटाना अनिवार्य
- सेफ हार्बर प्रोटेक्शन खत्म: नियम न मानने वाली सोशल मीडिया कंपनियों की कानूनी ढाल खत्म होगी, उन पर भी दर्ज हो सकेगी एफआईआर
- क्रिमिनल फ्रॉड पर जेल: एआई से किसी की आवाज या चेहरा बदलकर धोखाधड़ी, ब्लैकमेल या मानहानि करने पर 3 साल तक की जेल और ₹5 लाख तक का जुर्माना
- स्वदेशी AI डिटेक्टर टूल: सरकार ने साइबर सेल के लिए ‘AI-फॉरेंसिक टूलकिट’ तैनात किया जो 99% सटीकता से फेक वीडियो पहचान लेता है
- नागरिकों को सीधा अधिकार: राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर डीपफेक की तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी
IT Ministry New AI Deepfake Rules: केंद्र सरकार ने जारी किए सख्त नियम, अब फेक वीडियो पर होगी जेल
पिछले कुछ महीनों में मशहूर अभिनेत्रियों, उद्योगपतियों, राजनेताओं और आम युवतियों के चेहरों को एआई टूल्स के जरिए अश्लील या फर्जी वीडियो में बदलने के कई सनसनीखेज मामले सामने आए थे। इसके अलावा साइबर ठगों द्वारा लोगों के रिश्तेदारों की आवाज की हूबहू नकल (Voice Cloning) करके बैंक खातों से लाखों रुपये ठगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी थीं।
इसी खतरे को देखते हुए केंद्रीय आईटी मंत्रालय ने भारतीय दंड संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत नियमों को बेहद सख्त बना दिया है। नए नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी दुर्भावना, वित्तीय धोखाधड़ी, राजनीतिक दुष्प्रचार या किसी महिला के शीलभंग के उद्देश्य से डीपफेक बनाता या सोशल मीडिया पर शेयर करता है, तो इसे गैर-जमानती अपराध माना जाएगा और दोषी को 3 साल तक की कैद और भारी आर्थिक जुर्माना भुगतना होगा।
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Mandatory Cryptographic Watermarking: हर एआई फोटो और वीडियो पर लेबल लगाना क्यों हुआ अनिवार्य?
नए नियमों का सबसे तकनीकी और क्रांतिकारी प्रावधान क्रिप्टोग्राफिक वॉटरमार्किंग का है। सरकार ने सभी एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों (जैसे OpenAI, Google, Meta, Midjourney आदि) और भारतीय डेवलपर्स को आदेश दिया है कि वे अपने सॉफ्टवेयर में ऐसा सिस्टम लागू करें जिससे एआई द्वारा बनाई गई हर तस्वीर, ऑडियो और वीडियो के मेटाडेटा में एक परमानेंट डिजिटल हस्ताक्षर (C2PA स्टैंडर्ड) खुद-ब-खुद जुड़ जाए।
यह डिजिटल वॉटरमार्क ऐसा होगा जिसे कोई क्रॉप करके, फिल्टर लगाकर या स्क्रीन रिकॉर्डिंग करके भी मिटा नहीं सकेगा। इसके अलावा वीडियो या फोटो के कोने में कम से कम 10% हिस्से पर बड़े अक्षरों में स्पष्ट लेबल दिखना जरूरी होगा कि “यह सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा जनरेट की गई है”। इससे सोशल मीडिया पर स्क्रोल करने वाले आम यूजर को पहली नजर में ही पता चल जाएगा कि जो वह देख रहा है वह असली नहीं बल्कि कंप्यूटर द्वारा बनाया गया वीडियो है।

24-Hour Takedown Rule: शिकायत मिलते ही सोशल मीडिया कंपनियों को 24 घंटे में हटानी होगी सामग्री
पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जब कोई व्यक्ति अपने फर्जी वीडियो की शिकायत करता था, तो कंपनियां यह कहकर पल्ला झाड़ लेती थीं कि वे केवल एक प्लेटफॉर्म (Intermediary) हैं और कंटेंट किसी यूजर ने डाला है। इसके चलते आपत्तिजनक वीडियो कई हफ्तों तक वायरल रहता था और पीड़ित की भारी बदनामी हो जाती थी।
लेकिन अब नए नियमों ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय कर दी है। आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत कंपनियों को जो ‘सेफ हार्बर’ (कानूनी मुकदमे से सुरक्षा) मिलता था, वह अब इस शर्त पर निर्भर करेगा कि पीड़ित नागरिक या सरकारी एजेंसी की शिकायत मिलने के अधिकतम 24 घंटे के भीतर उस डीपफेक कंटेंट को प्लेटफॉर्म से पूरी तरह ब्लॉक या डिलीट कर दिया जाए। यदि कोई कंपनी 24 घंटे में कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो उस कंपनी और उसके नोडल अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकेगा।
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Heavy Penalties & Legal Action: फर्जी वीडियो बनाने और फैलाने वालों पर क्या होगी कानूनी सजा?
नए नियमों के तहत कार्रवाई को तीन स्तरों पर विभाजित किया गया है। अगर कोई व्यक्ति किसी का फर्जी अश्लील वीडियो या डीपफेक न्यूडिटी बनाता है, तो उस पर पॉक्सो एक्ट (यदि नाबालिग शामिल हो) और भारतीय न्याय संहिता की गैर-जमानती धाराओं के तहत 5 वर्ष तक का कठोर कारावास होगा।
वहीं अगर एआई वॉयस क्लोनिंग के जरिए किसी बुजुर्ग या नागरिक को फोन करके पैसे ऐंठे जाते हैं, तो इसे साइबर डकैती और संगठित अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस तुरंत आरोपी के बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट फ्रीज कर सकेगी। जो लोग जानबूझकर बिना सच्चाई जाने ऐसे वीडियो को व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप्स में फॉरवर्ड करते हैं, वे भी कानूनी जांच के दायरे में आएंगे।
How to Protect Yourself from Deepfakes: असली और नकली वीडियो की पहचान कैसे करें – आसान तरीके
साइबर विशेषज्ञों ने आम नागरिकों के लिए डीपफेक की पहचान करने के कुछ बहुत ही आसान और व्यावहारिक टिप्स साझा किए हैं:
- पलकों का झपकना (Blinking Rate): डीपफेक वीडियो में चेहरे की आंखें या तो बिल्कुल नहीं झपकतीं या बहुत अजीब और असामान्य तरीके से झपकती हैं।
- होठों और आवाज का तालमेल (Lip-Sync): वीडियो को ध्यान से देखें कि क्या बोलने वाले के होठों की बनावट और उसके द्वारा बोले जा रहे शब्दों की आवाज में हल्का सा अंतर (Mismatch) दिख रहा है।
- चेहरे और गर्दन की त्वचा का रंग: कई बार एआई चेहरे का रंग तो बदल देता है लेकिन गर्दन, कान और बालों की सीमा रेखा पर धुंधलापन (Blurriness) या अजीब परछाई छूट जाती है।
- चश्मे और आभूषणों की चमक: अगर व्यक्ति ने चश्मा पहना है, तो देखें कि क्या कमरे की लाइट का रिफ्लेक्शन चश्मे के शीशे पर दोनों तरफ एक जैसा है या हिल रहा है।
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How to Report Deepfake Videos on National Cyber Crime Portal: शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया
यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य किसी डीपफेक, फर्जी फोटो या वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड का शिकार होता है, तो बिल्कुल घबराएं नहीं। तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
1. सबसे पहले उस वीडियो, पोस्ट या प्रोफाइल का लिंक (URL) और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रख लें।
2. तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाएं या टोल-फ्री राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
3. पोर्टल पर ‘Report Other Cyber Crime’ या महिलाओं से संबंधित अपराध के लिए ‘Report Women/Child Related Crime’ विकल्प चुनें और घटना का पूरा विवरण दर्ज करें।
4. शिकायत दर्ज होते ही आपको एक पावती संख्या (Acknowledgement Number) मिलेगी, जिसके आधार पर संबंधित राज्य की साइबर पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तुरंत कंटेंट ब्लॉक करने का आदेश जारी कर दिया जाएगा। सरकार के इन सख्त कदमों से अब डिजिटल दुनिया भारतीय नागरिकों के लिए कहीं अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकेगी।
