नई दिल्ली (टेक डेस्क): एशिया के सबसे बड़े डिजिटल और दूरसंचार महाकुंभ, इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC 2026) का भव्य शुभारंभ राजधानी नई दिल्ली स्थित यशोभूमि (द्वारका) में हुआ। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ (Scale Without Boundaries) रखा गया है। उद्घाटन सत्र के दौरान रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए ऐलान किया कि जियो ने भारत में 100% स्वदेशी रूप से विकसित किए गए अपने एंड-टू-एंड 5G टेलीकॉम स्टैक (Jio True 5G Stack) को अब दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में एक्सपोर्ट करने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके साथ ही सम्मेलन में भारत के 6G रिसर्च रोडमैप, डिजिटल इंडिया के बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म ‘भाषिणी’ और घरेलू चिपसेट निर्माण की दिशा में देश की अभूतपूर्व प्रगति का शानदार प्रदर्शन किया गया।
जियो का स्वदेशी 5G स्टैक: भारत अब आयातक नहीं, दूरसंचार तकनीक का निर्यातक
आकाश अंबानी ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ साल पहले तक भारत दूरसंचार हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के लिए पश्चिमी देशों और चीन की कंपनियों पर निर्भर रहता था। लेकिन रिलायंस जियो के भारतीय इंजीनियरों ने क्लाउड-नेटिव 5G कोर, ओपन-आरएएन (Open-RAN) रेडियो, और मैसिव मिमो (Massive MIMO) एंटेना तकनीक को पूरी तरह स्वदेशी स्तर पर डिजाइन और तैयार किया है।
जियो अब इस घरेलू 5G तकनीक को ग्लोबल टेलीकॉम ऑपरेटर्स को एक किफायती और हाई-परफॉरमेंस ‘मैनेज्ड सर्विसेज मॉडल’ के तहत बेचेगा। इससे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप के छोटे टेलीकॉम ऑपरेटर्स बहुत कम लागत में अगली पीढ़ी का 5G नेटवर्क खड़ा कर सकेंगे। यह कदम भारत को वैश्विक दूरसंचार निर्यात के क्षेत्र में एरिक्सन, नोकिया और हुआवेई जैसी दिग्गज कंपनियों के समकक्ष लाकर खड़ा कर देगा और देश के लिए अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा राजस्व जुटाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भारत में 6G टेक्नोलॉजी की तैयारी: 100 से अधिक पेटेंट्स दर्ज
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में केवल 5G ही नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी की 6G वायरलेस टेक्नोलॉजी का भी सजीव प्रदर्शन देखने को मिला। दूरसंचार विभाग (DoT) और ‘भारत 6G एलायंस’ के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) और स्टार्टअप्स ने टेराहर्ट्ज़ (THz) फ्रीक्वेंसी पर काम करने वाले वायरलेस ट्रांसमिशन का सफल परीक्षण प्रदर्शित किया।
विशेषज्ञों ने दिखाया कि 6G तकनीक के जरिए इंटरनेट स्पीड 1 टेराबिट प्रति सेकंड (1 Tbps) तक पहुंच सकेगी, जो 5G से लगभग 100 गुना तेज है। इससे होलोग्राफिक टेलीप्रेजेंस (सामने खड़े जीवित इंसान जैसा 3D प्रोजेक्शन), रिमोट रोबोटिक सर्जरी, और पूरी तरह स्वायत्त फ्लाइंग टैक्सियों का संचालन वास्तविक समय में बिना किसी लैग (Zero Latency) के संभव हो सकेगा। भारत ने अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6G तकनीक से जुड़े 100 से अधिक कोर पेटेंट्स आधिकारिक रूप से फाइल कर दिए हैं, जो यह दर्शाता है कि 6G के आगमन पर भारत वैश्विक मानकों को तय करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
‘भाषिणी एआई’ का जलवा: भाषा की दीवार को खत्म करता डिजिटल भारत
सम्मेलन में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पवेलियन में स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘भाषिणी’ (BHASHINI) ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। भाषिणी ने रियल-टाइम मल्टीलिंगुअल स्पीच-टू-स्पीच ट्रांसलेशन का प्रदर्शन किया।
इसके जरिए यदि कोई व्यक्ति तमिल, असमिया या भोजपुरी में बोलता है, तो सामने वाले व्यक्ति के हेडफोन में वह आवाज उसी व्यक्ति के टोन में तुरंत अंग्रेजी, हिंदी या जर्मन भाषा में सुनाई देती है। इस तकनीक का उपयोग अब सरकारी अदालतों के फैसलों के अनुवाद, यूपीआई में आवाज से पैसे भेजने, और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन डॉक्टरों से बातचीत करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसके साथ ही ‘एपीआई सेतु’ (API Setu) के जरिए भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को दुनिया के कई विकासशील देशों में लागू करने के समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
दूरसंचार निर्माण में आत्मनिर्भरता और सेमीकंडक्टर क्रांति
आईएमसी 2026 में घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को लेकर भी उत्साहजनक आंकड़े पेश किए गए। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत भारत में अब 5G बेस स्टेशन्स, ऑप्टिकल फाइबर केबल्स, वाई-फाई 7 राउटर्स और सिक्योर स्मार्ट मीटर्स का निर्माण रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है। देश में बने टेलीकॉम उपकरणों का निर्यात पिछले एक वर्ष में 35% से अधिक बढ़ा है।
गुजरात के धोलेरा और असम के मोरीगांव में बन रहे टाटा और माइक्रोन के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स से पहली ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स का प्रोटोटाइप भी इस मंच पर प्रदर्शित किया गया। दूरसंचार मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संचार और चिपसेट के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता की असली गारंटी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा? सस्ते 5G फोन और सुपरफास्ट ब्रॉडबैंड
इस पूरे तकनीकी बदलाव का सीधा फायदा आम भारतीय उपभोक्ताओं को मिलने जा रहा है। सम्मेलन में घरेलू और विदेशी ब्रांड्स ने ₹8,000 से कम कीमत वाले अल्ट्रा-बजट 5G स्मार्टफोन्स और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA – 5G एयरफाइबर) डिवाइसेज पेश किए हैं। इससे आने वाले महीनों में देश के छोटे गांवों और कस्बों में भी बिना किसी तार के 100 Mbps से अधिक की इंटरनेट स्पीड बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकेगी।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब तकनीक को केवल अपनाने वाला उपभोक्ता देश नहीं रहा, बल्कि वह भविष्य की वैश्विक तकनीकों का नवप्रवर्तक और निर्माता बन चुका है। दूरसंचार, 5G-6G और डिजिटल क्रांति से जुड़ी सभी बड़ी खबरों और विशेषज्ञ विश्लेषण के लिए हमारे टेक्नोलॉजी पोर्टल को पढ़ते रहें।

सैटेलाइट इंटरनेट और आपदा प्रबंधन में 5G की भूमिका
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में केवल मोबाइल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से सीधे मिलने वाले सैटेलाइट ब्रॉडबैंड और डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) कनेक्टिविटी का भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। जियो स्पेसफाइबर (JioSpaceFiber) के जरिए देश के सबसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों जैसे लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार में बिना किसी मोबाइल टावर के सीधे सैटेलाइट से सुपरफास्ट इंटरनेट पहुंचाने की तकनीक प्रदर्शित की गई।
बाढ़, भूकंप या किसी प्राकृतिक आपदा के समय जब जमीन के सारे तार और टावर टूट जाते हैं, तब यह सैटेलाइट-5G हाइब्रिड तकनीक राहत एवं बचाव दलों के लिए जीवन रेखा साबित हो सकती है। इसके जरिए एनडीआरएफ के जवान लाइव ड्रोन फुटेज देखकर फंसे हुए लोगों तक तुरंत राहत सामग्री और मेडिकल सहायता पहुंचा सकेंगे।
स्मार्ट सिटीज, स्मार्ट एग्रीकल्चर और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति
सम्मेलन में भारतीय कृषि को स्मार्ट बनाने के लिए 5G-संचालित सॉइल सेंसर्स और ऑटोनॉमस ड्रोन स्प्रेयर्स का लाइव डेमो दिया गया। किसान अपने स्मार्टफोन से खेत की मिट्टी में नमी, खाद की आवश्यकता और कीटों के हमले की सटीक जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम्स में 5G एआई कैमरों के जरिए एंबुलेंस को ग्रीन कॉरिडोर देने की तकनीक भी दिखाई गई। आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि 5G और 6G तकनीक से 2030 तक भारत की जीडीपी में 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक का सीधा योगदान होगा।
