नई दिल्ली (राजनीतिक डेस्क): राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आज 13 अक्टूबर 2026 की दोपहर विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के शीर्ष नेताओं की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय रणनीति बैठक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 10, जनपथ स्थित आवास पर संपन्न हुई। करीब तीन घंटे तक चली इस व्यापक बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत और द्रमुक प्रतिनिधियों सहित 18 प्रमुख विपक्षी दलों के नेता उपस्थित रहे। बैठक के पश्चात आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में गठबंधन ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर चिंता जताते हुए एक संयुक्त प्रस्ताव पारित किया और आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची विसंगतियों को लेकर सरकार को चौतरफा घेरने का शंखनाद किया।
INDIA गठबंधन रणनीति बैठक 13 अक्टूबर 2026: प्रमुख निष्कर्ष व राजनीतिक प्रस्ताव:
- चुनाव आयोग पर साझा प्रस्ताव: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पुनः शामिल करने की कानूनी लड़ाई तेज करना।
- मतदाता सूची (SIR) विसंगतियां: राज्य विधानसभा चुनावों से पूर्व अल्पसंख्यक व वंचित बस्तियों से लाखों वोटों के कथित विलोपन पर स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट की मांग।
- राष्ट्रपति से मिलने का समय: विपक्षी दलों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा।
- शीतकालीन सत्र संयुक्त फ्लोर रणनीति: संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों का साझा फ्लोर कोऑर्डिनेशन और कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने पर सहमति।
- साझा रैलियों का खाका: महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के चुनावी राज्यों में साझा जनसभाओं और संयुक्त घोषणापत्र की रूपरेखा तैयार।
1. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची विसंगतियों पर आर-पार की जंग
बैठक के उपरांत प्रेस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल खड़े किए:
- सीजेआई को चयन समिति से बाहर करने का विरोध: विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि 2023 के कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से देश के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर कार्यपालिका ने आयोग को एकतरफा राजनीतिक नियंत्रण में ले लिया है, जिससे लोकतांत्रिक निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
- डिजिटल मतदाता सूची का फॉरेंसिक ऑडिट: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि हालिया उपचुनावों और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण में विशेष समुदायों के मतदाताओं के नाम बिना उचित सत्यापन के हटाए गए। गठबंधन ने मांग की कि पूरी मतदाता सूची का स्वतंत्र साइबर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
- ईवीएम और वीवीपीएटी पर्चियों की 100% गिनती: गठबंधन ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में वीवीपीएटी पर्चियों की सौ फीसदी मिलान की याचिका पर नए सिरे से कानूनी साक्ष्य पेश किए जाएंगे।
- चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल: गठबंधन ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग द्वारा मतदान के अंतिम आंकड़ों और फॉर्म 17C के डेटा को जारी करने में होने वाली देरी पर कड़े कानूनी नियम बनाए जाने चाहिए।
2. विपक्षी गठबंधन बनाम निर्वाचन आयोग व सत्तापक्ष: प्रमुख संवैधानिक और राजनीतिक टकराव
संसद और सड़कों पर छिड़े इस राजनीतिक संग्राम के मुख्य मुद्दों पर विपक्ष और सत्ताधारी पक्ष के दृष्टिकोण में गहरा अंतर देखने को मिल रहा है:
1. मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन समिति का विवाद
विपक्षी गठबंधन की मुख्य मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति वाली तीन सदस्यीय समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अनिवार्य रूप से शामिल रखा जाए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2023 में निर्देशित किया था। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ने नया कानून बनाकर सीजेआई के स्थान पर एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखकर समिति में सरकार का 2:1 का बहुमत सुनिश्चित कर लिया है। इसके विपरीत, सरकार और विधि मंत्रालय का कहना है कि संसद को संविधान के अनुच्छेद 324(2) के तहत कानून बनाने का संप्रभु अधिकार है और कार्यपालिका का यह कदम पूरी तरह से संवैधानिक मर्यादाओं के अनुकूल है।
2. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची शुद्धिकरण
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनावों से ऐन पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के बहाने विपक्षी गढ़ों, ग्रामीण इलाकों और अल्पसंख्यक बस्तियों से हजारों वास्तविक मतदाताओं के नाम चुपचाप विलोपित (Delete) कर दिए जाते हैं। विपक्ष ने इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण एक सतत, पारदर्शी और वैधानिक प्रक्रिया है जिसमें केवल दोहरे पंजीकरण, स्थानांतरित मतदाताओं और मृत व्यक्तियों के नाम ही कानूनी प्रक्रिया और फॉर्म-7 नोटिस के बाद हटाए जाते हैं।
3. वीवीपीएटी (VVPAT) पर्चियों का भौतिक मिलान
INDIA ब्लॉक का रुख है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में केवल 5 रैंडम ईवीएम की वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती पर्याप्त नहीं है; जनविश्वास बहाली के लिए कम से कम 50% से 100% पर्चियों की अनिवार्य गिनती होनी चाहिए। इसके उलट, चुनाव आयोग और सत्तापक्ष का तर्क है कि 100% गिनती से चुनावी नतीजों में हफ्तों की देरी होगी और सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही वैज्ञानिक सांख्यिकी के आधार पर मौजूदा 5-बूथ प्रति विधानसभा के फॉर्मूले को पूरी तरह पुख्ता और त्रुटिहीन माना है।
3. संसद के शीतकालीन सत्र और आगामी राज्य चुनावों में संयुक्त मोर्चा
बैठक में उपस्थित नेताओं ने स्पष्ट किया कि विपक्षी एकता केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके लिए एक संयुक्त अभियान समिति गठित की गई है जो निम्नलिखित रणनीतियों पर काम करेगी:
- साझा समन्वय सचिवालय: संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन सुबह विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक होगी ताकि सदन में सरकार को नियम 267 के तहत चर्चा के लिए बाध्य किया जा सके।
- राज्य विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारा: झारखंड और महाराष्ट्र में सीट बंटवारे के जटिल पेच को दो दिनों के भीतर सुलझाकर साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी।
- संविधान बचाओ जन जागरण यात्रा: 1 नवंबर से देश के 100 प्रमुख जिला मुख्यालयों पर साझा जनसभाओं का आयोजन किया जाएगा।
- संयुक्त कानूनी सेल: चुनावी धांधली और आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर तत्काल सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दाखिल करने के लिए वरिष्ठ वकीलों की एक समर्पित टीम बनाई गई है।
विपक्षी रणनीति और हालिया विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ के लिए पाठक हमारी पिछली रिपोर्ट INDIA Bloc Supreme Court March और Delhi Protest Sites De-Notification भी पढ़ सकते हैं।
