नई दिल्ली (विशेष राजनीतिक संवाददाता): राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शनों और नागरिक आंदोलनों के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक केंद्र को लेकर आज 12 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने एक ऐतिहासिक व दूरगामी प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित उच्चस्तरीय सुरक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से जंतर-मंतर (Jantar Mantar) को प्रदर्शन स्थल (Protest Site) के रूप में डी-नोटिफाई (रद्द) कर दिया है। आदेश के अनुसार, अब जंतर-मंतर रोड पर किसी भी प्रकार के धरने, भूख हड़ताल, राजनीतिक रैलियों और सामूहिक सभाओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक जनसभाओं के लिए राजधानी में तीन वैकल्पिक स्थल—रामलीला मैदान (मध्य दिल्ली), बुराड़ी ग्राउंड (उत्तरी दिल्ली), और सीबीडी ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) निर्धारित किए गए हैं। इस निर्णय पर नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताते हुए इसे लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का प्रयास करार दिया है।
जंतर-मंतर डी-नोटिफिकेशन आदेश के मुख्य बिंदु व नए नियम:
- आदेश जारी करने की तिथि: 12 अक्टूबर 2026 (दिल्ली पुलिस कमिश्नर कार्यालय)
- प्रतिबंधित क्षेत्र: जंतर-मंतर रोड, संसद मार्ग, पटेल चौक और कनॉट प्लेस के आसपास का 1 किमी का दायरा
- प्रमुख कारण: भारी ट्रैफिक जाम, लुटियंस जोन की सुरक्षा संवेदनशीलता, ध्वनि प्रदूषण और ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण
- 3 नए अधिकृत प्रदर्शन स्थल: रामलीला मैदान (नई दिल्ली), बुराड़ी उत्सव ग्राउंड (नॉर्थ दिल्ली), एवं सीबीडी ग्राउंड कड़कड़डूमा (ईस्ट दिल्ली)
- अनुमति प्रक्रिया: अब किसी भी धरने के लिए कम से कम 7 दिन पहले दिल्ली पुलिस के सिंगल-विंडो पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य होगा
- उल्लंघन पर कार्रवाई: बीएनएस (BNS) और दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत गैर-जमानती धाराओं में तत्काल एफआईआर व हिरासत
1. जंतर-मंतर को हटाने की पृष्ठभूमि: ऐतिहासिक महत्व और ट्रैफिक का संकट
वर्ष 1993 में जब ऐतिहासिक बोट क्लब (Boat Club) पर किसानों और यूनियनों के विशाल प्रदर्शनों के बाद पाबंदी लगाई गई थी, तब जंतर-मंतर को राजधानी का मुख्य धरना स्थल बनाया गया था। पिछले 33 वर्षों में यह स्थल भारत के कई ऐतिहासिक जनांदोलनों (अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, निर्भया आंदोलन, वन रैंक वन पेंशन, पहलवानों का विरोध) का गवाह रहा है:
- लुटियंस जोन का ट्रैफिक चोक: जंतर-मंतर सीधे कनॉट प्लेस, संसद भवन, मंत्रालयों और विभिन्न दूतावासों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है। आए दिन होने वाले प्रदर्शनों से पूरे मध्य दिल्ली की यातायात व्यवस्था ठप हो जाती थी।
- एएसआई (ASI) की रिपोर्ट: 18वीं शताब्दी में निर्मित ऐतिहासिक वेधशाला जंतर-मंतर के पत्थरों और उपकरणों को लाउडस्पीकरों के अत्यधिक कंपन और भारी भीड़ से नुकसान पहुंच रहा था, जिसे लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कई बार चिंता जताई थी।
- सुरक्षा समीक्षा: गृह मंत्रालय की समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संसद और वीवीआईपी मार्ग के इतने करीब अनिश्चितकालीन धरनों की अनुमति देना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम है।
2. जंतर-मंतर बनाम नए प्रदर्शन स्थल: तुलनात्मक विश्लेषण
दिल्ली के पुराने और नए प्रदर्शन स्थलों की क्षमता, लोकेशन और सुविधाओं की तुलना नीचे दी गई है:
| स्थान का नाम (Venue) | लोकेशन | आधिकारिक क्षमता | पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी | सुरक्षा और अनुमति स्तर |
|---|---|---|---|---|
| जंतर-मंतर (अब पूर्णतः प्रतिबंधित) | संसद मार्ग / कनॉट प्लेस (सेंट्रल) | लगभग 1,000 व्यक्ति | पटेल चौक व जनपथ मेट्रो | डी-नोटिफाइड (0 अनुमति) |
| रामलीला मैदान (नया प्राथमिक स्थल) | अजमेरी गेट, नई दिल्ली स्टेशन के पास | 50,000+ व्यक्ति | नई दिल्ली व चावड़ी बाजार मेट्रो | बड़े राजनीतिक दलों और रैलियों के लिए |
| बुराड़ी निरंकारी उत्सव ग्राउंड | उत्तरी दिल्ली (आउटर रिंग रोड) | 1,00,000+ व्यक्ति | समयपुर बादली मेट्रो व डीटीसी बसें | विशाल किसान संगठनों और महापंचायतों हेतु |
| सीबीडी ग्राउंड (कड़कड़डूमा) | आनंद विहार के निकट (ईस्ट दिल्ली) | 20,000 व्यक्ति | कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन | ट्रेड यूनियनों और क्षेत्रीय धरनों हेतु |
3. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष ने बताया ‘लोकतंत्र की आवाज दबाने वाला फैसला’
दिल्ली पुलिस के इस फैसले पर विपक्षी दलों और जन-आंदोलनकारियों ने कड़ा आक्रोश जताया है:
- विपक्ष का तर्क: विपक्षी सांसदों का कहना है कि संसद के करीब प्रदर्शन करने से सरकार तक जनता की आवाज सीधे पहुंचती थी। शहर के किनारे बुराड़ी जैसे सुदूर इलाकों में प्रदर्शन स्थल बनाकर सरकार असहमति को नजरअंदाज करना चाहती है।
- गृह मंत्रालय का स्पष्टीकरण: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को खत्म नहीं किया गया है, बल्कि आधुनिक शहरी प्रबंधन और नागरिकों के आवागमन के मौलिक अधिकार को संतुलित करने के लिए अधिक विस्तृत और सुरक्षित मैदान आवंटित किए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का संदर्भ: सर्वोच्च न्यायालय ने ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ मामले में स्पष्ट किया था कि प्रदर्शन के अधिकार और आम नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए।
4. राजधानी की कानून-व्यवस्था और संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजधानी में विरोध मार्चों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक संवेदनशील बनी हुई है। जैसा कि हमने हमारी पूर्व कवरेज Supreme Court Nationwide Guidelines Due Process और Infrastructure & Logistics Development में रेखांकित किया है, राष्ट्रीय राजधानी को एक आधुनिक और सुगम मेगा-सिटी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधारों की गति तेज की जा रही है।
5. नए पोर्टल से अनुमति लेने की प्रक्रिया
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान या बुराड़ी ग्राउंड में किसी भी धरने के लिए आयोजकों को दिल्ली पुलिस के ऑनलाइन सिंगल-विंडो सिस्टम पर आवेदन करना होगा। आवेदन में प्रदर्शनकारियों की संभावित संख्या, लाउडस्पीकर का उपयोग, और सुरक्षा व एम्बुलेंस व्यवस्था का विवरण देना होगा। अनुमति मिलने के बाद ही निर्धारित समयावधि में प्रदर्शन किया जा सकेगा।
6. Jantar Mantar Protest De-Notification अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को क्यों बंद किया?
लुटियंस जोन में गंभीर ट्रैफिक जाम, संसद भवन के निकट सुरक्षा संवेदनशीलता और एएसआई संरक्षित ऐतिहासिक वेधशाला को ध्वनि प्रदूषण से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है।
Q2. जंतर-मंतर के बदले कौन से नए प्रदर्शन स्थल तय किए गए हैं?
दिल्ली पुलिस ने तीन स्थल अधिकृत किए हैं: रामलीला मैदान (सेंट्रल दिल्ली), बुराड़ी उत्सव ग्राउंड (नॉर्थ दिल्ली), और सीबीडी ग्राउंड कड़कड़डूमा (ईस्ट दिल्ली)।
Q3. यह नया आदेश कब से प्रभावी होगा?
यह आदेश आज 12 अक्टूबर 2026 से तत्काल प्रभाव से पूरी राष्ट्रीय राजधानी में लागू हो गया है।
Q4. क्या जंतर-मंतर पर अभी कोई धरना चल रहा है?
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड पर पहले से मौजूद सभी तंबुओं और अनिश्चितकालीन प्रदर्शनकारियों को वैकल्पिक स्थलों पर शिफ्ट होने का नोटिस जारी किया है।
Q5. यदि कोई बिना अनुमति जंतर-मंतर पर धरना देता है तो क्या कार्रवाई होगी?
बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर धारा 144 के उल्लंघन और लोक सेवक के आदेश की अवहेलना के तहत तत्काल हिरासत और एफआईआर दर्ज की जाएगी।
Q6. रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए कैसे अनुमति मिलेगी?
आयोजकों को कार्यक्रम से कम से कम 7 दिन पहले दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करके एनओसी प्राप्त करनी होगी।
Q7. जंतर-मंतर को पहली बार प्रदर्शन स्थल कब बनाया गया था?
वर्ष 1993 में बोट क्लब पर प्रतिबंध लगने के बाद जंतर-मंतर को औपचारिक रूप से प्रदर्शन स्थल के रूप में नोटिफाई किया गया था।
Q8. क्या पर्यटक अब जंतर-मंतर वेधशाला का भ्रमण कर सकेंगे?
जी हां, प्रदर्शनकारियों के हटने के बाद आम पर्यटकों और खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए जंतर-मंतर स्मारक का दौरा अब अधिक सुगम और शांतिपूर्ण होगा।
Q9. क्या विपक्षी दल इस आदेश को अदालत में चुनौती दे रहे हैं?
कई नागरिक अधिकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की घोषणा की है।
Q10. क्या रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए कोई शुल्क देना होता है?
दिल्ली नगर निगम (MCD) के नियमों के अनुसार बड़े राजनीतिक सम्मेलनों के लिए निर्धारित सरकारी बुकिंग शुल्क लागू होता है।
