नई दिल्ली (राष्ट्रीय व रक्षा डेस्क): भारतीय सैन्य इतिहास में अदम्य साहस, अभूतपूर्व रणनीतिक पराक्रम और राष्ट्रीय संप्रभुता के नए युग की शुरुआत करने वाली ऐतिहासिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 28-29 सितंबर 2016 की वह काली रात आज भी हर भारतीय के दिल में गर्व और देशभक्ति की एक नई ऊर्जा भर देती है, जब भारतीय थल सेना की 4 और 9 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के जांबाज कमांडोज ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार गुलाम कश्मीर (PoK) में 3 किलोमीटर भीतर घुसकर पाकिस्तानी सेना के संरक्षण में चल रहे आतंकवादियों के 7 लॉन्च पैड्स को पूरी तरह तबाह कर दिया था। इस साहसिक सैन्य अभियान ने न केवल उरी हमले का मुंहतोड़ बदला लिया, बल्कि भारत की दशकों पुरानी ‘रणनीतिक संयम’ (Strategic Restraint) की रक्षा नीति को हमेशा के लिए बदलकर ‘सक्रिय निवारण’ (Active Deterrence) में तब्दील कर दिया।
पृष्ठभूमि: 18 सितंबर का वो कायराना उरी हमला और राष्ट्र का आक्रोश
सर्जिकल स्ट्राइक की पृष्ठभूमि 18 सितंबर 2016 की सुबह जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी में स्थित भारतीय सेना की 12वीं ब्रिगेड के मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले से जुड़ी है। तड़के सुबह जब सैनिक अपनी बैरकों में सो रहे थे, तब जैश-ए-मोहम्मद के चार भारी हथियारों से लैस आत्मघाती आतंकियों ने सेना के कैंप पर ग्रेनेड और आग लगाने वाले हथियारों से हमला बोल दिया था। इस कायरतापूर्ण हमले में भारतीय सेना के 19 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
उरी हमले के बाद पूरे देश में आतंकियों और उनके सीमा पार बैठे आकाओं के खिलाफ भारी गुस्सा और आक्रोश था। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और दोषियों को उनके घर में घुसकर सजा दी जाएगी।
28-29 सितंबर 2016: उस ऐतिहासिक रात का पल-पल का घटनाक्रम
सैन्य खुफिया एजेंसियों (Military Intelligence) और रॉ (R&AW) को पुख्ता जानकारी मिली थी कि पीओके में नियंत्रण रेखा के पार भिंबर, केल, लीपा, और तत्तापानी सेक्टरों में बने लॉन्च पैड्स पर दर्जनों फिदायीन आतंकी भारत में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की तैयारी में बैठे हैं। इन्हें पाकिस्तानी सेना की चौकियों से भारी कवर फायर और रसद मिल रही थी। इसके बाद भारतीय स्पेशल फोर्सेज के कमांडोज को इस गुप्त और संवेदनशील ऑपरेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई:
रात 10:00 बजे: नियंत्रण रेखा के पार विभिन्न अग्रिम चौकियों पर भारतीय सेना की आर्टिलरी गनों ने पाकिस्तानी चौकियों पर भारी मोर्टार शेलिंग शुरू कर दी, ताकि दुश्मन का ध्यान भटकाया जा सके और सीमा पार भारी आवाज में कमांडोज की हलचल छिप सके।
रात 12:30 बजे: 4 और 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज की अलग-अलग टीमों ने अत्याधुनिक इजरायली तवोर TAR-21 असॉल्ट राइफल्स, नाइट विजन गॉगल्स, थर्मल इमेजर्स और साइलेंसर वाले हथियारों के साथ चुपचाप रेंगते हुए बारूदी सुरंगों (Minefields) और कंटीले तारों को पार किया।
रात 02:00 बजे: कमांडोज बिना किसी आहट के चिन्हित 7 आतंकी लॉन्च पैड्स के 50 मीटर के दायरे में पहुंच गए। आतंकियों को भनक तक नहीं थी कि मौत उनके सिर पर खड़ी है।
रात 02:30 बजे से 03:30 बजे: कमांडोज ने एक साथ आरपीजी (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड्स), शोल्डर-फायर्ड मिसाइल्स और सी-4 एक्सप्लोसिव्स से आतंकी ठिकानों पर भीषण हमला बोला। कंक्रीट के बंकरों और इमारतों को चंद मिनटों में मलबे के ढेर में बदल दिया गया। लगभग 40 से 50 आतंकी, उनके हैंडलर्स और सुरक्षा में तैनात पाकिस्तानी सैनिक मौके पर ही ढेर हो गए।
सुबह 04:30 बजे: ऑपरेशन को 100% सटीकता के साथ अंजाम देने के बाद सभी भारतीय कमांडोज बिना किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान के सुरक्षित भारतीय सीमा में वापस लौट आए।
सैन्य सिद्धांत में युगांतरकारी बदलाव: ‘रणनीतिक संयम’ से ‘प्रो-एक्टिव डिफेंस’ तक
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा दर्शन (National Security Doctrine) में आया एक ऐतिहासिक मोड़ था। 1971 के युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उसकी सेना ने नियंत्रण रेखा पार करके दुश्मन के क्षेत्र में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया है।
इसने पाकिस्तान के उस ‘परमाणु ब्लैकमेल’ (Nuclear Blackmail) के झूठे भ्रम को हमेशा के लिए तोड़ दिया, जिसकी आड़ में वह भारत में सीमा पार आतंकवाद को पालता-पोसता था। भारत ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि आतंकवाद को अब कोई ‘छद्म युद्ध’ नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे सीधा युद्ध अपराध माना जाएगा और भारत जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर आत्मरक्षा में प्रहार करने का पूरा अधिकार रखता है। इसी साहसिक नीति का विस्तार 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के रूप में भी पूरी दुनिया ने देखा।
पिछले 10 वर्षों में कितना बदला भारतीय रक्षा तंत्र और सुरक्षा नीति?
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद के एक दशक में भारत की रक्षा तैयारियों और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं:
1. आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा उत्पादन: पिछले 10 वर्षों में भारत रक्षा आयातक देश से उभरकर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक बनने की ओर अग्रसर हुआ है। आज भारतीय सेना के पास स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम, धनुष व एटीएजीएस तोपें, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, और जोरावर लाइट टैंक जैसी आधुनिक प्रणालियां हैं।
2. एलओसी और एलएसी पर इन्फ्रास्ट्रक्चर क्रांति: बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने अटल टनल, सेला टनल और लद्दाख-अरुणाचल की अग्रिम चौकियों तक ऑल-वेदर सड़कों और पुलों का जाल बिछा दिया है, जिससे भारतीय सेना चंद घंटों में भारी हथियारों और टैंकों के साथ सीमा पर तैनात हो सकती है।
3. हाई-टेक सर्विलांस और ड्रोन वारफेयर: भारतीय सीमाओं पर अब एआई-संचालित स्मार्ट फेंसिंग, कॉम्बैट ड्रोन्स, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और स्वायत्त हथियार प्रणालियों का पहरा है, जिससे सीमा पार से किसी भी तरह की घुसपैठ को तुरंत डिटेक्ट करके निष्प्रभावी कर दिया जाता है।
सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने पर पूरा देश उन वीर सैनिकों के शौर्य, बलिदान और अनुशासन को नमन करता है जिन्होंने तिरंगे की शान को दुनिया के नक्शे पर ऊंचा किया। राष्ट्रीय सुरक्षा, भू-राजनीतिक रणनीतियों और देश की सुरक्षा नीति से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट के लिए हमारे पॉलिटिक्स एवं राष्ट्रीय मामले पेज को अवश्य पढ़ें।
