नई दिल्ली (विशेष संवाददाता): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की महत्वपूर्ण बैठक में देश की अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि क्षेत्र को गति देने वाले कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णयों को मंजूरी प्रदान की गई है। कैबिनेट ने ₹1.86 लाख करोड़ के भारी-भरकम निवेश वाले ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 (Green Energy Corridor Phase-III) को स्वीकृति दे दी है, जिसके तहत देश भर में 65 गीगावाट (GW) सौर और पवन ऊर्जा के पारेषण (Transmission) हेतु अत्याधुनिक ग्रिड नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं को बड़ी राहत देते हुए रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ₹160 प्रति क्विंटल और सरसों में ₹300 प्रति क्विंटल की रिकॉर्ड बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।
केंद्रीय कैबिनेट बैठक (1 अक्टूबर 2026) के प्रमुख ऐतिहासिक फैसले:
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3: ₹1,86,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, 8 प्रमुख राज्यों में 65 GW क्लीन एनर्जी ग्रिड कनेक्टिविटी
- रबी फसलों का नया MSP: गेहूं का समर्थन मूल्य ₹160 बढ़कर ₹2,435 प्रति क्विंटल हुआ; सरसों ₹300 बढ़कर ₹5,950 प्रति क्विंटल
- दलहन उत्पादन प्रोत्साहन: चना (Gram) के एमएसपी में ₹225 और मसूर (Lentil) में ₹275 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- दिल्ली-एनसीआर ट्रैफिक सुधार: ₹4,200 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक एआई-संचालित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) मंजूर
- रोजगार सृजन: इन परियोजनाओं से देश भर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 4.5 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित होंगे
1. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3: भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता की रीढ़
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। आज स्वीकृत किया गया ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 इस सपने को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना के अंतर्गत राजस्थान के थार मरुस्थल, लद्दाख के लेह-कारगिल क्षेत्र, गुजरात के कच्छ, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के विशाल सौर व पवन ऊर्जा संयंत्रों से उत्पन्न होने वाली बिजली को सीधे राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
फेज-3 की मुख्य तकनीकी विशेषताएं:
- 42,000 सर्किट किलोमीटर (ckm) ट्रांसमिशन लाइनें: हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) और अल्ट्रा हाई-वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (765kV) लाइनें बिछाई जाएंगी जिससे बिजली पारेषण के दौरान होने वाले नुकसान में 18% की कमी आएगी।
- 135 गिगा-वोल्ट एम्पीयर (GVA) सबस्टेशन क्षमता: विशाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के साथ सबस्टेशनों को इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे रात के समय भी सौर ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती: इस ट्रांसमिशन नेटवर्क के चालू होने से सालाना लगभग 8.2 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
2. रबी फसलों का नया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP 2027-28)
किसानों की आय बढ़ाने और दलहन-तिलहन में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कैबिनेट ने रबी फसलों के लिए उत्पादन लागत पर कम से कम 50% से 105% तक लाभ सुनिश्चित करने वाला नया एमएसपी घोषित किया है।
| रबी फसल | नया MSP (2027-28) प्रति क्विंटल | पिछला MSP प्रति क्विंटल | प्रति क्विंटल शुद्ध बढ़ोतरी | लागत पर अनुमानित लाभ (%) |
|---|---|---|---|---|
| गेहूं (Wheat) | ₹2,435 | ₹2,275 | +₹160 | 102% |
| सरसों / तोरिया (Rapeseed & Mustard) | ₹5,950 | ₹5,650 | +₹300 | 98% |
| चना (Gram) | ₹5,675 | ₹5,450 | +₹225 | 60% |
| मसूर (Lentil) | ₹6,700 | ₹6,425 | +₹275 | 89% |
| जौ (Barley) | ₹1,980 | ₹1,850 | +₹130 | 63% |
| कुसुम (Safflower) | ₹6,140 | ₹5,800 | +₹340 | 52% |
3. दिल्ली-एनसीआर के लिए ₹4,200 करोड़ का इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS)
राजधानी दिल्ली और आसपास के नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में हर रोज लाखों लोगों को लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कैबिनेट ने एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड ITMS प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है।
- अडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल्स: 1,200 से अधिक चौराहों पर रियल-टाइम ट्रैफिक डेंसिटी के अनुसार सिग्नल स्वतः हरे या लाल होंगे।
- इमरजेंसी ग्रीन कॉरिडोर: एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को बिना रुके निकलने के लिए ऑटोमैटिक जीपीएस बेस्ड ग्रीन वेव मिलेगी।
- ई-चालान व फेस रिकग्निशन: रेड लाइट जंप, ओवर-स्पीडिंग और लेन अनुशासन तोड़ने वालों पर 360-डिग्री एचडी कैमरों से स्वतः चालान कटेगा।
4. केंद्रीय मंत्रियों का आधिकारिक वक्तव्य
कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा: “आज के फैसले भारत के भविष्य को संवारने वाले हैं। ₹1.86 लाख करोड़ का ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर देश को दुनिया की सबसे स्वच्छ और किफायती ऊर्जा महाशक्ति बनाएगा। वहीं हमारे अन्नदाता किसान भाइयों को रबी फसलों का जो मूल्य दिया गया है, वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप लागत पर दोगुना मुनाफा सुनिश्चित करता है।”
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
उत्तर: इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत ₹1,86,000 करोड़ (1.86 लाख करोड़ रुपये) है, जिसे केंद्र सरकार, राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज और वैश्विक ग्रीन क्लाइमेट फंड्स के सहयोग से पूरा किया जाएगा।
Q2: गेहूं का नया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या तय किया गया है?
उत्तर: रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य ₹160 बढ़ाकर ₹2,435 प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
Q3: सरसों के एमएसपी में कितनी बढ़ोतरी की गई है?
उत्तर: सरसों/तोरिया के समर्थन मूल्य में ₹300 प्रति क्विंटल की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसका नया भाव ₹5,950 प्रति क्विंटल हो गया है।
Q4: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: सौर और पवन ऊर्जा की सुगम आपूर्ति से आने वाले समय में बिजली कटौती में भारी कमी आएगी, ग्रिड ट्रिपिंग की समस्या खत्म होगी और स्वच्छ ऊर्जा के कारण बिजली की प्रति यूनिट दरें सस्ती होंगी।
Q5: दिल्ली का नया ITMS ट्रैफिक प्रोजेक्ट कब तक बनकर तैयार होगा?
उत्तर: इस परियोजना को आगामी 24 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में दिल्ली के 400 प्रमुख चौराहे कवर किए जाएंगे।
Q6: क्या एमएसपी पर फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी है?
उत्तर: केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (FCI) और नैफेड (NAFED) के माध्यम से किसानों से निर्धारित एमएसपी पर अनाज और दलहन की सरकारी खरीद सुनिश्चित करती है।
Q7: इस कैबिनेट फैसले से कितने रोजगार पैदा होंगे?
उत्तर: बुनियादी ढांचा निर्माण, सोलर ग्रिड इंस्टॉलेशन, ट्रांसमिशन टावर निर्माण और ट्रैफिक ऑपरेशंस में 4.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
Q8: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 किन राज्यों से गुजरेगा?
उत्तर: यह ग्रिड राजस्थान, लद्दाख, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रमुख क्लस्टरों को जोड़ेगा।
निष्कर्ष: स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत का तेज कदम और किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब मूल्य देना, यह दर्शाता है कि भारत सतत विकास (Sustainable Development) और समावेशी आर्थिक वृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
