नई दिल्ली/पटना (लीगल व एजुकेशन डेस्क): देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में हुए बहुचर्चित पेपर लीक कांड की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आज 14 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू विशेष अदालत (Rouse Avenue Special CBI Court) में अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट (दूसरी पूरक चार्जशीट) आधिकारिक तौर पर दाखिल कर दी है। सीबीआई की इस नई चार्जशीट में 14 अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ मजबूत फॉरेंसिक और डिजिटल सबूत पेश किए गए हैं, जिसमें अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग के मुख्य सरगना संजीव मुखिया उर्फ लूतन मुखिया, हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के निलंबित प्रिंसिपल अहसानुल हक और प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े दो तकनीकी कर्मचारियों के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर 2026 को मुकर्रर की है।
📌 NEET-UG पेपर लीक मामला: सीबीआई चार्जशीट की मुख्य बातें (Key Highlights)
- दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट: दिल्ली की विशेष अदालत में 14 आरोपियों के खिलाफ 1,200 पन्नों का व्यापक आरोप-पत्र दाखिल
- मुख्य साजिशकर्ता बेनकाब: सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड संजीव मुखिया, हजारीबाग केंद्र समन्वयक और प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी नामजद
- भारी मनी ट्रेल उजागर: प्रत्येक अभ्यर्थी से पेपर रटवाने के बदले ₹30 लाख से ₹45 लाख तक की मोटी रकम वसूलने के पुख्ता बैंक सबूत
- डिजिटल फॉरेंसिक प्रमाण: जले हुए प्रश्न पत्रों के अधजले टुकड़ों का सीएफएसएल हैदराबाद द्वारा ओरिजिनल मास्टर कॉपी से शत-प्रतिशत मिलान
- कठोर धाराएं लागू: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 की गैर-जमानती धाराएं
- कोर्ट की अगली तारीख: राउज एवेन्यू अदालत 24 अक्टूबर को सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर बहस (Argument on Charges) सुनेगी
NEET-UG Paper Leak Case: सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद इस पूरे मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच एजेंसी ने बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में छापेमारी करके 40 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आज दाखिल की गई दूसरी पूरक चार्जशीट में सीबीआई ने साबित किया है कि यह पेपर लीक कोई स्थानीय घटना नहीं थी, बल्कि यह विभिन्न राज्यों में फैला हुआ एक सुनियोजित संगठित माफिया नेटवर्क था।
चार्जशीट के अनुसार, झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल में परीक्षा के दिन सुबह बैंक लॉकर से सीलबंद ट्रंक लाते समय विशेष कटर की मदद से बक्से के नीचे का ताला छेड़ा गया था और प्रश्न पत्र की डिजिटल तस्वीरें खींचकर पटना के लर्न प्ले स्कूल में मौजूद एमबीबीएस सॉल्वर छात्रों के पास टेलीग्राम पर भेजी गई थीं, जहां दर्जनों छात्रों को रात भर उत्तर रटवाए गए थे।
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Big Revelations in Chargesheet: सॉल्वर गैंग, प्रिंटिंग प्रेस और डिजिटल लीक का पूरा कच्चा चिट्ठा
सीबीआई ने अदालत के समक्ष कई चौंकाने वाले वैज्ञानिक सबूत पेश किए हैं। जांच एजेंसी ने पटना के खेमनीचक स्थित सेफ हाउस से जो अधजले प्रश्न पत्र बरामद किए थे, उनका सीएफएसएल (Central Forensic Science Laboratory) द्वारा रासायनिक और स्पेक्ट्रोस्कोपिक परीक्षण कराया गया। फॉरेंसिक जांच में साबित हो गया कि अधजले पन्नों पर छपा सीरियल कोड और प्रिंटिंग स्याही उसी विशेष प्रेस की थी जहां एनटीए ने मूल पेपर छपवाए थे।
इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क से डिलीट की गई व्हाट्सएप्प चैट्स, टेलीग्राम फाइल्स और कॉल रिकॉर्ड्स को सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया गया है। चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा के अभ्यर्थियों के अभिभावकों से ब्लैंक चेक, ऑरिजिनल 10वीं-12वीं की मार्कशीट और पोस्ट-डेटेड चेक गिरवी रखवाए थे, ताकि पेपर पास होने के बाद पैसे मिलने में कोई रुकावट न आए।

Masterminds Arrested: संजीव मुखिया और मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ किन धाराओं में केस?
सीबीआई ने चार्जशीट में गिरोह के मुख्य सरगना संजीव मुखिया उर्फ लूतन मुखिया को मुख्य आरोपी बनाया है। मुखिया का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह बिहार में पहले भी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक कराने में शामिल रहा है। इसके साथ ही हजारीबाग स्कूल के प्रिंसिपल अहसानुल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम और पटना के दलाल चिंटू व मुकेश कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 338 (कूटनीति), 336 (जालसाजी), 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आरोप तय किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, संसद द्वारा हाल ही में पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 (Public Examinations Prevention of Unfair Means Act 2024) की धारा 9 और 10 के तहत भी पहली बार मामले दर्ज किए गए हैं। इस नए कानून के तहत संगठित परीक्षा माफिया के लिए न्यूनतम 10 साल की सजा और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है, जिसमें किसी भी आरोपी को जमानत मिलना लगभग नामुमकिन है।
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Rouse Avenue Court Hearing on October 24: कोर्ट में अब आगे क्या-क्या कानूनी प्रक्रिया होगी?
विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने आज दाखिल चार्जशीट की प्रति सभी आरोपियों के अधिवक्ताओं को सौंपने का निर्देश दिया है। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 24 अक्टूबर 2026 को होगी। इस दिन अदालत चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान (Cognizance) लेते हुए आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर बहस (Arguments on Charge Framing) की रूपरेखा निर्धारित करेगी।
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने अदालत से अनुरोध किया है कि चूंकि यह मामला देश के 24 लाख से अधिक होनहार युवाओं के भविष्य और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए इस मुकदमे की सुनवाई फास्ट-ट्रैक डे-टू-डे (प्रतिदिन) आधार पर की जानी चाहिए ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाई जा सके।
High-Level Security Reforms for NEET-UG 2027: अब कैसे होगी परीक्षा? NTA का नया सुरक्षा मॉडल
इस ऐतिहासिक पेपर लीक कांड के बाद केंद्र सरकार द्वारा पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर नीट परीक्षा प्रणाली का कायाकल्प कर दिया गया है। आगामी NEET-UG 2027 परीक्षा से निम्नलिखित क्रांतिकारी सुरक्षा सुधार लागू किए जा रहे हैं:
- हाइब्रिड परीक्षा मॉडल: पेपर लीक की संभावना खत्म करने के लिए प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से केवल 15 मिनट पहले ऑनलाइन एन्क्रिप्टेड कोड के जरिए सेंटर पर भेजे जाएंगे और सेंटर पर ही डिजिटल प्रिंटिंग होगी, जिससे ट्रांसपोर्टेशन के दौरान पेपर लीक का खतरा शून्य हो जाएगा।
- मल्टी-स्टेज बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर और परीक्षा हॉल के भीतर सीट पर दो बार लाइव फेशियल रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) और आयरिस स्कैनिंग होगी ताकि मुन्नाभाई या डमी छात्र बिल्कुल न बैठ सकें।
- एआई-बेस्ड सीसीटीवी लाइव मॉनिटरिंग: हर परीक्षा हॉल में 360-डिग्री नाइट-विज़न कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी लाइव फीड सीधे नई दिल्ली स्थित एनटीए सेंट्रल कमांड सेंटर से एआई टूल्स द्वारा मॉनिटर की जाएगी। किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत अलार्म बज जाएगा।
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What Medical Aspirants Should Know: क्या भविष्य की मेडिकल परीक्षाओं पर पड़ेगा कोई असर?
अदालत में चल रही इस कानूनी कार्यवाही से वर्तमान और आगामी सत्रों की काउंसलिंग या कक्षाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि योग्य और ईमानदार छात्रों का समय बर्बाद नहीं किया जा सकता।
सीबीआई की इस सख्त चार्जशीट और सरकार द्वारा लागू किए जा रहे कड़े सुरक्षा नियमों से मेडिकल की तैयारी कर रहे मेहनती और गरीब परिवारों के छात्रों में यह भरोसा फिर से बहाल हुआ है कि अब कोई भी माफिया पैसों के दम पर उनकी मेहनत पर डाका नहीं डाल सकेगा। छात्रों को बिना किसी अफवाह पर ध्यान दिए पूरी लगन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए।
