नई दिल्ली (एजुकेशन डेस्क): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत स्कूली शिक्षा के मूल्यांकन ढांचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक सुधार लागू करने की घोषणा की है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 में कक्षा 10 में जाने वाले और वर्ष 2028 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए सीबीएसई ने परीक्षा योजना (Scheme of Examination) में व्यापक बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब छात्रों के लिए पांच अनिवार्य विषय होंगे, लेकिन उनके साथ एक अतिरिक्त वोकेशनल/स्किल विषय (Skill Subject) एक सुरक्षा कवच यानी ‘सेफ्टी नेट’ (Safety Net) के रूप में कार्य करेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान जैसे किसी कठिन मुख्य विषय में उत्तीर्ण अंक हासिल नहीं कर पाता है, लेकिन उसने स्किल विषय में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, तो स्किल विषय के अंक उस मुख्य विषय को रिप्लेस कर देंगे और छात्र का समग्र परिणाम ‘पास’ घोषित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बोर्ड ने पर्यावरण शिक्षा (Environmental Education) को अलग विषय के रूप में हटा दिया है।
सीबीएसई के नए परीक्षा ढांचे के प्रमुख बिंदु और नियम
सीबीएसई द्वारा सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को भेजे गए आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, नई परीक्षा प्रणाली को छात्रों के परीक्षा तनाव को कम करने और उन्हें व्यावहारिक रोजगारोन्मुखी कौशल सिखाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
नई परीक्षा योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. पांच अनिवार्य विषय और दो भाषाएं: प्रत्येक छात्र को अनिवार्य रूप से दो भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम एक भाषा भारतीय भाषा (जैसे हिंदी, संस्कृत, उर्दू, बंगाली आदि) होना अनिवार्य है। इसके अलावा तीन मुख्य विषय—गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान होंगे।
2. स्किल सब्जेक्ट का ‘सेफ्टी नेट’ फॉर्मूला: छात्र छठे विषय के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT), वित्तीय साक्षरता, ऑटोमोटिव या डेटा साइंस जैसे 33 अनुमोदित वोकेशनल विषयों में से कोई एक चुन सकेंगे। यदि कोई छात्र गणित या विज्ञान में 33% अंक नहीं ला पाता, लेकिन स्किल सब्जेक्ट में पास हो जाता है, तो उसके रिजल्ट में फेल नहीं लिखा जाएगा बल्कि स्किल विषय के अंकों के आधार पर उसे 10वीं उत्तीर्ण माना जाएगा।
3. पर्यावरण शिक्षा (EVS) अलग विषय के रूप में खत्म: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण शिक्षा को अब एक स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाने के बजाय उसे विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में ही समाहित कर दिया गया है ताकि छात्रों पर किताबों का बोझ कम हो सके।
4. आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) का 20% वेटेज: प्रत्येक विषय में 80 अंक की बोर्ड परीक्षा और 20 अंक का स्कूल स्तर पर प्रायोगिक/प्रोजेक्ट आधारित आंतरिक मूल्यांकन होगा।

रटने की संस्कृति से व्यावहारिक ज्ञान की ओर बड़ा कदम
भारत में पारंपरिक बोर्ड परीक्षाओं की सबसे बड़ी खामी यह रही है कि इसमें छात्रों की योग्यता का पैमाना केवल तीन घंटे की लिखित परीक्षा और रटने की क्षमता पर आधारित होता था। गणित या विज्ञान में कमजोर होने के कारण हर साल लाखों प्रतिभाशाली बच्चे अवसाद का शिकार हो जाते थे या स्कूल छोड़ देते थे।
सीबीएसई का यह नया सेफ्टी नेट फॉर्मूला छात्रों को एक बहुआयामी सुरक्षा प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र कोडिंग या ग्राफिक डिजाइन में बहुत कुशल है लेकिन गणित के कठिन समीकरणों में उलझ जाता है, तो उसका एक साल बर्बाद नहीं होगा। वह अपनी पसंदीदा वोकेशनल स्किल के दम पर कक्षा 11 में अपनी पसंद की स्ट्रीम में आगे बढ़ सकेगा।
कक्षा 11 में विषय चयन की पात्रता पर क्या असर पड़ेगा?
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र गणित में फेल होकर स्किल सब्जेक्ट के जरिए पास होता है, तो वह कक्षा 11 में उच्च गणित या भौतिक विज्ञान (PCM) ग्रुप नहीं चुन सकेगा। लेकिन वह वाणिज्य (बिना गणित), मानविकी (Arts), फाइन आर्ट्स, वोकेशनल कोर्सेज और अन्य एप्लाइड स्ट्रीम्स में बिना किसी रुकावट के प्रवेश ले सकेगा। यदि छात्र बाद में साइंस स्ट्रीम लेना चाहता है, तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा में गणित का पेपर पास करना होगा।
अभिभावकों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
सीबीएसई के इस निर्णय का शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों ने व्यापक स्वागत किया है। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे कक्षा 9 से ही छात्रों को वोकेशनल विषयों की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग देना शुरू करें। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों पर केवल पारंपरिक विषयों में 95% लाने का दबाव बनाने के बजाय उनकी स्वाभाविक रुचि और तकनीकी कौशल को पहचानने में मदद करें। स्कूली शिक्षा, सीबीएसई बोर्ड और करियर गाइडेंस की सभी ताजा खबरों के लिए हमारे एजुकेशन पोर्टल से लगातार जुड़े रहें।
सीबीएसई द्वारा अनुमोदित 33 वोकेशनल एवं स्किल विषयों की सूची
सीबीएसई ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए जिन 33 रोजगारोन्मुखी कौशलों को मंजूरी दी है, वे अत्याधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक मांग के अनुरूप हैं। इनमें प्रमुख विषय इस प्रकार हैं:
1. तकनीकी एवं डिजिटल कौशल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Subject Code 417), सूचना प्रौद्योगिकी (Code 402), डेटा साइंस, कोडिंग, और डिजिटल एनीमेशन।
2. प्रबंधन और वाणिज्यिक कौशल: वित्तीय साक्षरता (Introduction to Financial Markets), रिटेल मैनेजमेंट, बैंकिंग एवं इंश्योरेंस, और मार्केटिंग व सेल्स।
3. व्यावहारिक और रचनात्मक कौशल: ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, हैंडीक्राफ्ट्स, फूड प्रोडक्शन, ब्यूटी एंड वेलनेस, एग्रीकल्चर और टूरिज्म।
इन विषयों का पाठ्यक्रम 70% प्रायोगिक (Hands-on Practice) और 30% सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित होता है। इससे छात्रों को स्कूल स्तर पर ही यह समझ में आ जाता है कि उद्योग जगत में किस तरह का काम होता है, जिससे वे 10वीं के बाद सही करियर दिशा चुन पाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बोर्ड्स (IB और कैम्ब्रिज) की तर्ज पर भारतीय शिक्षा का आधुनिकीकरण
दुनिया के अधिकांश विकसित देशों—जैसे ब्रिटेन, सिंगापुर, फिनलैंड और अमेरिका में माध्यमिक शिक्षा प्रणाली में वोकेशनल विषयों को मुख्य शैक्षणिक विषयों के बराबर दर्जा दिया जाता है। इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) और कैम्ब्रिज बोर्ड्स में छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार विषयों का संयोजन चुनने की पूरी स्वतंत्रता होती है।
सीबीएसई का यह सुधार भारतीय शिक्षा को वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करता है। इससे भारत के उन लाखों छात्रों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी जो पढ़ाई में व्यावहारिक रूप से बहुत तेज होते हैं लेकिन किताबी परिभाषाओं को याद करने में कमजोर पड़ जाते थे। स्कूलों में अब केवल किताबों तक सीमित पढ़ाई के बजाय वोकेशनल लैब्स और प्रोजेक्ट वर्क पर जोर दिया जाएगा, जिससे भारत के युवाओं में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता (Entrepreneurship) की भावना मजबूत होगी।
शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि केवल नियमों में बदलाव करना ही काफी नहीं है, बल्कि स्कूलों को धरातल पर कुशल शिक्षकों और आधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस करना भी अनिवार्य है।
इसके लिए बोर्ड ने ‘कौशल शिक्षक प्रशिक्षण अभियान’ (Skill Teacher Training Drive) शुरू किया है जिसके तहत अगले दो वर्षों में देश भर के 28,000 से अधिक संबद्ध स्कूलों के 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों को उद्योग विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कंप्यूटर लैब्स में पायथन कोडिंग, एआई सॉफ्टवेयर और रोबोटिक्स किट्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। जिन ग्रामीण स्कूलों में हाई-एंड लैब्स नहीं हैं, वहां डिजिटल इंडिया मिशन और पीएम-ईविद्या के इंटरएक्टिव वर्चुअल लैब्स का उपयोग करके छात्रों को प्रैक्टिकल कराया जाएगा ताकि किसी भी छात्र को संसाधनों की कमी के कारण पीछे न छूटना पड़े।
भविष्य के रोजगार और कौशल विकास की अनिवार्यता
आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में पारंपरिक डिग्रियों के मुकाबले कौशल आधारित ज्ञान (Skill-based Knowledge) का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उद्योग जगत में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से सामान्य क्लर्क या डेटा एंट्री की नौकरियां तेजी से घट रही हैं। ऐसे समय में सीबीएसई द्वारा 10वीं स्तर पर ही छात्रों को वोकेशनल विषयों से जोड़ना देश के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार (Future-ready) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जब छात्र स्कूल स्तर पर ही प्रैक्टिकल काम सीखते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे उच्च शिक्षा या सीधे स्वरोजगार में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
