नई दिल्ली (टेक्नोलॉजी एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेस्क): यदि आप अक्सर भारतीय रेल से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा नियम जानना आवश्यक है। भारतीय रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने देश भर के सभी जोनल रेलवे महाप्रबंधकों को कड़े निर्देश जारी करते हुए चलती ट्रेनों में रात के समय मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के चार्जिंग पॉइंट्स को अनिवार्य रूप से बंद रखने का आदेश दिया है। नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, मेल और एक्सप्रेस सहित सभी यात्री ट्रेनों में रात 11:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक सभी चार्जिंग सॉकेट्स की मुख्य बिजली आपूर्ति बंद (Switch Off) रहेगी। रेलवे ने यह कड़ा कदम हाल के महीनों में ट्रेनों के डिब्बों में घटित आगजनी की घटनाओं और ओवरहीटिंग के खतरों की गहन तकनीकी जांच के बाद यात्रियों की जान-माल की रक्षा के लिए उठाया है।
रेलवे बोर्ड ने यह सख्त फैसला क्यों लिया? तकनीकी जांच में क्या निकला?
भारतीय रेल के कोचों में आग लगने की घटनाओं की जब रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) और फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा जांच की गई, तो चौंकाने वाले तकनीकी तथ्य सामने आए। अधिकांश आग लगने के मामलों का प्राथमिक कारण बीड़ी या सिगरेट नहीं, बल्कि यात्रियों द्वारा रात भर चार्जिंग पर लगाए गए सस्ते और घटिया इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पाए गए।
जांच रिपोर्ट में निम्नलिखित तकनीकी जोखिमों को रेखांकित किया गया है:
1. रात भर ओवरचार्जिंग और सस्ते चार्जर फटना: कई यात्री रात को सोते समय अपने मोबाइल फोन, पावर बैंक या लैपटॉप को चार्जिंग पर लगाकर सो जाते हैं। बाजार में मिलने वाले ₹100-₹200 के घटिया लोकल चार्जर में वोल्टेज रेगुलेटर और ओवरहीट प्रोटेक्शन नहीं होता। 5-6 घंटे लगातार प्लग में लगे रहने से ये चार्जर अत्यधिक गर्म होकर पिघल जाते हैं और उनमें शॉर्ट सर्किट हो जाता है।
2. बर्थ की रेग्जीन और गद्दों का ज्वलनशील होना: ट्रेन की बर्थ के गद्दे, तकिए और कंबल ज्वलनशील फोम और कपड़े से बने होते हैं। सॉकेट से निकलने वाली चिंगारी यदि गद्दे के संपर्क में आ जाए, तो कुछ ही मिनटों में पूरा कोच आग की लपटों में घिर जाता है।
3. रात के समय यात्रियों का गहरी नींद में होना: दिन के समय यदि किसी सॉकेट से धुआं निकलता है तो यात्री या ऑन-बोर्ड स्टाफ तुरंत देख लेता है और फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझा देता है। लेकिन रात 11 से सुबह 5 बजे के बीच अधिकांश यात्री गहरी नींद में होते हैं, जिससे आग फैलने की स्थिति में संभलने का मौका नहीं मिलता।

ट्रेनों का इलेक्ट्रिकल सिस्टम कैसे काम करता है?
कई यात्रियों को यह गलतफहमी होती है कि ट्रेन का चार्जिंग पॉइंट घर के प्लग जैसा ही होता है। लेकिन रेलवे कोच का इलेक्ट्रिकल सिस्टम काफी जटिल और संवेदनशील होता है:
110V डीसी बनाम 220V एसी: पुराने आईसीएफ (ICF) कोचों में इनवर्टर के जरिए 110-वोल्ट डीसी (Direct Current) पावर सप्लाई होती है, जबकि आधुनिक एलएचबी (LHB) कोचों में कपलिंग जनरेटर कार (EOG) से 415V थ्री-फेज सप्लाई को ट्रांसफॉर्मर के जरिए 220V एसी में बदला जाता है।
मल्टी-प्लग और एक्सटेंशन बोर्ड का अनधिकृत इस्तेमाल: अक्सर देखा गया है कि एक ही चार्जिंग पॉइंट पर यात्री मल्टी-प्लग लगाकर एक साथ तीन-चार फोन और लैपटॉप जोड़ देते हैं। इससे सॉकेट के तारों पर अत्यधिक एम्पीयर का लोड पड़ता है, जिससे जंक्शन बॉक्स गर्म होकर पिघल जाता है। रेलवे ने साफ किया है कि ट्रेनों में मल्टी-प्लग एक्सटेंशन बोर्ड का उपयोग पूरी तरह गैर-कानूनी है।
यात्रियों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश: यात्रा के दौरान क्या करें और क्या न करें?
ट्रेन में सुरक्षित और बाधामुक्त यात्रा के लिए रेलवे ने यात्रियों से निम्नलिखित सहयोग की अपील की है:
1. दिन के समय ही चार्ज कर लें अपने गैजेट्स: ट्रेन में सुबह 5:00 बजे से रात 11:00 बजे तक चार्जिंग पॉइंट्स पूरी तरह चालू रहते हैं। अपनी सोने की आदत से पहले शाम को ही मोबाइल और लैपटॉप पूरी तरह चार्ज कर लें।
2. प्रमाणित (BIS Approved) पावर बैंक साथ रखें: लंबी यात्रा पर निकलते समय एक अच्छी कंपनी का बीआईएस प्रमाणित 10,000 या 20,000 एमएएच का पावर बैंक साथ रखें ताकि रात में इमरजेंसी में फोन इस्तेमाल किया जा सके। पावर बैंक को भी रात में ट्रेन के सॉकेट में चार्ज पर न लगाएं।
3. ओरिजिनल केबल और एडाप्टर का उपयोग: केवल मोबाइल फोन के साथ आने वाले ब्रांडेड ओरिजिनल फास्ट चार्जर और टाइप-सी केबल्स का ही उपयोग करें।
4. धुआं या चिंगारी दिखने पर तुरंत अलार्म बजाएं: यदि किसी सॉकेट या स्विच बोर्ड से प्लास्टिक जलने की गंध, धुआं या चिंगारी दिखाई दे, तो तुरंत कोच अटेंडेंट, टीटीई को सूचित करें या आपातकालीन चेन खींचें। कोच के दोनों छोर पर रखे सूखे पाउडर वाले अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) का इस्तेमाल करें।
नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई यात्री मेन स्विच से छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है या कोच में अत्यधिक लोड वाले हीटर या केतली का उपयोग करता पाया जाता है, तो रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 164 और 165 के तहत उस पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
निष्कर्ष: यात्री सुरक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता
ट्रेनों में रात के समय चार्जिंग पॉइंट्स बंद करने से कुछ यात्रियों को थोड़ी असुविधा जरूर हो सकती है, लेकिन करोड़ों यात्रियों की जान और रेल संपत्ति की सुरक्षा के आगे यह एक बेहद जरूरी और स्वागत योग्य कदम है। तकनीकी सुरक्षा, रेलवे नियमों और आधुनिक गैजेट्स से जुड़े अपडेट्स के लिए हमारे टेक्नोलॉजी सेक्शन को लगातार फॉलो करते रहें।
ट्रेनों में आग से बचाव के लिए आरडीएसओ (RDSO) के तकनीकी मानक
भारतीय रेल के अनुसंधान, डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) ने आधुनिक एलएचबी (LHB) और वंदे भारत कोचों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए कई उन्नत तकनीकी सुरक्षा उपाय शामिल किए हैं।
प्रत्येक कोच में एफआरसीए (Fire Retardant Cables) यानी आग प्रतिरोधी तारों का उपयोग किया जाता है जो अत्यधिक तापमान पर भी सुलगते नहीं हैं। इसके अलावा कोचों की छत में ‘वेरी अर्ली स्मोक डिटेक्शन अप्लायंस’ (VESDA) और एरोसोल आधारित स्वचालित अग्निशामक प्रणालियां लगाई जा रही हैं। लेकिन जब किसी यात्री का अत्यधिक गर्म हुआ चार्जर सीधे कपड़े की चादर या तकिए के संपर्क में आता है, तो आग तार से नहीं बल्कि बाहरी कपड़े से शुरू होती है। यही वजह है कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विंग ने रात के 6 घंटों के दौरान सॉकेट्स की मुख्य एमसीबी (Miniature Circuit Breaker) को स्विच ऑफ करने का सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक तरीका अपनाया है।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की रात्रि गश्त और निरीक्षण
इस नियम को कड़ाई से लागू करने के लिए सभी जोनल रेलवे ने आरपीएफ (RPF) और टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) की संयुक्त रात्रि गश्त टीमें गठित की हैं।
ये टीमें रात 11 बजे के बाद सभी कोचों में वॉकथ्रू करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई यात्री सॉकेट्स से छेड़छाड़ न कर रहा हो। यदि कोई यात्री अपनी सीट पर भारी इलेक्ट्रिकल उपकरण (जैसे इंडक्शन कुकटॉप, इमर्शन रॉड या बड़ा हीटर) चलाते हुए पकड़ा गया, तो सामान जब्त करने के साथ-साथ रेलवे सुरक्षा बल तुरंत एफआईआर दर्ज करेगा। यात्रियों को जागरूक करने के लिए स्टेशनों और ट्रेनों के डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड्स पर लगातार ऑडियो-विजुअल घोषणाएं भी प्रसारित की जा रही हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे का अगला कदम
यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए रेलवे बोर्ड ने स्टेशनों पर ‘अल्ट्रा-फास्ट मोबाइल चार्जिंग कियोस्क’ की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब प्रमुख स्टेशनों के वेटिंग हॉल और प्लेटफॉर्म्स पर सिक्योर लॉकर-आधारित चार्जिंग पॉइंट्स लगाए जा रहे हैं, जहां यात्री ट्रेन में चढ़ने से पहले मात्र 15 से 20 मिनट में अपना फोन 80% तक चार्ज कर सकते हैं। इसके साथ ही नए बनने वाले वंदे भारत स्लीपर कोचों में प्रत्येक बर्थ पर एक लो-वोल्टेज 5V/2A का इन-बिल्ट टाइप-सी यूएसबी पोर्ट दिया जा रहा है जिसमें ओवरकरेंट प्रोटेक्शन चिप लगी होगी, जिससे भविष्य में रात में भी कम वोल्टेज पर सुरक्षित चार्जिंग संभव हो सकेगी।
