नई दिल्ली (शिक्षा डेस्क): देश में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक तथा तकनीकी अनियमितताओं की बढ़ती घटनाओं पर स्थायी विराम लगाने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने आज 13 अक्टूबर 2026 को अपनी ऐतिहासिक अंतरिम रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को सौंप दी है। आधार कार्ड के जनक और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने परीक्षा प्रणाली के पूर्ण डिजिटल पुनर्गठन के लिए एक क्रांतिकारी ‘AI-संचालित सुरक्षित परीक्षा आर्किटेक्चर’ की सिफारिश की है। समिति की सबसे प्रमुख सिफारिश यह है कि प्रश्नपत्रों की छपाई और वितरण की पारंपरिक प्रणाली को समाप्त कर, परीक्षा शुरू होने से मात्र 15 मिनट पहले एन्क्रिप्टेड क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए गतिशील (Dynamic) प्रश्नपत्र तैयार किए जाएं। इसके साथ ही, निजी कॉलेजों में परीक्षा केंद्र बनाने की प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
नंदन नीलेकणि समिति परीक्षा सुधार ब्लूप्रिंट 2026: प्रमुख सिफारिशें व आंकड़े:
- डायनामिक एआई क्वेश्चन पेपर जेनरेशन: परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले सर्वर द्वारा प्रत्येक छात्र के लिए यूनिक क्वेश्चन सीक्वेंस और ऑप्शन शफलिंग तैयार करना।
- आउटसोर्सिंग पर पूर्ण प्रतिबंध: निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों या साइबर कैफे में राष्ट्रीय परीक्षाओं के केंद्र बनाने पर तत्काल प्रभाव से रोक।
- समर्पित सरकारी सीबीटी क्लस्टर: देशभर के केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और आईआईटी/एनआईटी परिसरों में 1,000 समर्पित स्थायी कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) केंद्रों का निर्माण।
- ब्लॉकचेन डिजिटल कस्टडी: प्रश्न बैंक से लेकर कंप्यूटर टर्मिनल तक हर डिजिटल डेटा पैकेट का टाइम-स्टैम्प और ब्लॉकचेन वेरिफिकेशन।
- बायोमेट्रिक कंटीन्यूअस ऑथेंटिकेशन: परीक्षा के दौरान प्रॉक्सी छात्रों को पकड़ने के लिए सीट पर लगे वेबकैम द्वारा लगातार फेस रिकग्निशन।
- लागू करने की समयसीमा: जनवरी 2027 से आयोजित होने वाली नीट (NEET-UG), जेईई मेन और सीयूईटी परीक्षाओं से चरणबद्ध शुरुआत।
1. अंतिम क्षणों में एआई प्रश्नपत्र निर्माण: पेपर लीक माफिया की कमर तोड़ने का फॉर्मूला
समिति की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि अधिकांश पेपर लीक प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन ट्रकों या परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम से होते हैं। नीलेकणि समिति ने इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला को ही समाप्त करने की रूपरेखा प्रस्तुत की है:
- विकेंद्रीकृत एन्क्रिप्टेड प्रश्न बैंक: देश भर के प्रतिष्ठित प्रोफेसरों द्वारा तैयार किए गए 50,000 से अधिक प्रश्नों का एक सुरक्षित रिपोजिटरी तैयार किया जाएगा, जो पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी से सुरक्षित रहेगा। किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को यह पता नहीं होगा कि कौन सा प्रश्न किस परीक्षा में आएगा।
- 15 मिनट पूर्व रियल-टाइम संकलन: परीक्षा केंद्र पर छात्र के बायोमेट्रिक लॉगिन के बाद, सुरक्षित एल्गोरिदम तुरंत उस विशिष्ट केंद्र के लिए एक अद्वितीय प्रश्न सेट को प्रोसेस करके केवल टर्मिनल की रैम (RAM) में लोड करेगा, जिससे हार्ड ड्राइव में कोई निशान नहीं छूटेगा।
- डिजिटल वॉटरमार्किंग: प्रत्येक कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित प्रश्नपत्र में छात्र का रोल नंबर और परीक्षा केंद्र का कोड पारदर्शी रूप से वॉटरमार्क रहेगा। यदि कोई छात्र या पर्यवेक्षक स्क्रीन की तस्वीर लेने की कोशिश करता है, तो सेकंडों में उसकी पहचान हो जाएगी।
- अद्वितीय प्रश्न और उत्तर क्रम: अगल-बगल बैठे दो छात्रों की स्क्रीन पर एक ही प्रश्न अलग-अलग क्रम में आएगा और उनके बहुविकल्पीय विकल्पों (A, B, C, D) का क्रम भी पूरी तरह भिन्न होगा, जिससे स्क्रीन झांककर नकल करना नामुमकिन होगा।
2. पुरानी आउटसोर्स्ड व्यवस्था बनाम नीलेकणि समिति का प्रस्तावित हाई-टेक मॉडल: नीतिगत बदलाव
भारतीय परीक्षा प्रणाली में पिछले दो दशकों से चली आ रही पुरानी कमजोरियों और प्रस्तावित नए हाई-टेक सीबीटी मॉडल के बीच के मूलभूत अंतर को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है:
1. परीक्षा केंद्रों का स्वामित्व और नियंत्रण
पुरानी व्यवस्था में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) या अन्य आयोग निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों, डिग्री कॉलेजों और व्यावसायिक कंप्यूटर लैब्स को परीक्षा केंद्र के रूप में किराए पर लेते थे। इन निजी केंद्रों के संचालकों की साठगांठ अक्सर स्थानीय नकल माफिया के साथ पाई जाती थी। नीलेकणि समिति ने निजी संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाने पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। नए मॉडल के तहत केवल केंद्रीय विद्यालय (KV), जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), आईआईटी, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सरकारी परिसरों में ही परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।
2. प्रश्नपत्र की सुरक्षा और वितरण प्रक्रिया
पारंपरिक प्रणाली में परीक्षा से कई सप्ताह पूर्व गोपनीय प्रेसों में लाखों प्रश्नपत्र छपवाए जाते थे और सीलबंद बक्सों में ट्रकों और बैंकों के जरिए स्ट्रांग रूम भेजे जाते थे। इस लंबी श्रृंखला में सैकड़ों लोगों की पहुंच पेपर तक होती थी। प्रस्तावित नए मॉडल में भौतिक प्रिंटिंग की आवश्यकता शून्य होगी। प्रश्नपत्र कभी भी हार्ड ड्राइव में स्टोर नहीं होंगे; वे सीधे केंद्रीय क्लाउड से एन्क्रिप्टेड टनल द्वारा परीक्षा शुरू होने के 15 मिनट पूर्व अभ्यर्थी के कंप्यूटर की वोलेटाइल मेमोरी (RAM) में स्ट्रीम किए जाएंगे।
3. उम्मीदवार सत्यापन और प्रॉक्सी रोकने के उपाय
मौजूदा समय में केंद्र के मुख्य द्वार पर केवल एक बार एडमिट कार्ड और थंब इम्प्रेशन जांचा जाता है, जिसके बाद कई मामलों में ‘सॉल्वर गैंग’ के फर्जी परीक्षार्थी सीट बदल लेते थे। नीलेकणि मॉडल में आधार-लिंक्ड आईरिस स्कैन के साथ-साथ अभ्यर्थी के कंप्यूटर टर्मिनल पर लगा हाई-डेफिनिशन कैमरा पूरी परीक्षा के दौरान लगातार एआई फेशियल रिकग्निशन करेगा। यदि अभ्यर्थी सीट से उठता है या कोई अन्य व्यक्ति स्क्रीन के सामने आता है, तो टर्मिनल स्वतः लॉक हो जाएगा।
4. तकनीकी सुरक्षा और नेटवर्क जैमिंग
पुरानी व्यवस्था में अक्सर सामान्य 2G/3G जैमर लगाए जाते थे जो आधुनिक 5G फ्रीक्वेंसी या वाई-फाई आधारित माइक्रो-स्पाई ईयरपीस को नहीं रोक पाते थे। नए मॉडल में सभी परीक्षा कक्षों को सैन्य-ग्रेड आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) शील्डेड बनाया जाएगा और इंटरनेट केबलिंग के बजाय एयर-गैप्ड फाइबर-ऑप्टिक प्राइवेट इंट्रानेट ग्रिड का उपयोग होगा जो सार्वजनिक इंटरनेट से पूरी तरह कटा रहेगा।
3. 1,000 समर्पित सीबीटी क्लस्टर: छात्रों को नहीं जाना पड़ेगा दूर-दराज
कमेटी ने पाया कि छात्रों को अक्सर अपनी परीक्षा देने के लिए 200 से 300 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जहां निजी केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव होता है। सरकार को दिए सुझाव में कहा गया है:
- राष्ट्रीय परीक्षण अवसंरचना निगम (NTIC): एक नई वैधानिक संस्था बनाई जाए जो देशभर के प्रत्येक जिले में 500 से 1,000 कंप्यूटरों की क्षमता वाले स्थायी आधुनिक केंद्र बनाएगी।
- वर्षभर बहुउद्देशीय उपयोग: जब परीक्षाएं नहीं होंगी, तो इन केंद्रों का उपयोग ग्रामीण और अर्ध-शहरी छात्रों को कोडिंग, डिजिटल साक्षरता और स्किल डेवलपमेंट सिखाने के लिए किया जाएगा।
- एयर-गैप्ड कंप्यूटर नेटवर्क: परीक्षा कक्षों के कंप्यूटर सार्वजनिक इंटरनेट से बिल्कुल अलग (Air-gapped) होंगे और केवल स्थानीय सर्वर से ऑप्टिकल फाइबर द्वारा सुरक्षित जुड़े होंगे।
- ऊर्जा बैकअप गारंटी: प्रत्येक क्लस्टर में डुअल जनरेटर और सोलर यूपीएस सिस्टम होगा ताकि बिजली कटने पर परीक्षा एक सेकंड के लिए भी बाधित न हो।
4. शिक्षाविदों की राय और आगामी परीक्षाओं पर प्रभाव
शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद इन सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रथम चरण में आगामी मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं को इस ढांचे पर लाया जाएगा। वर्तमान में चल रही शिक्षक और प्रशासनिक भर्ती प्रक्रियाओं की जानकारी के लिए अभ्यर्थी हमारी रिपोर्ट CTET December 2026 Notification और SSC CGL Tier-1 Updates भी देख सकते हैं।
