केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ देश की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पहुँचाते हुए साफ कहा कि अगले तीन साल तय करेंगे कि “नशा हमें हराएगा या हम नशे को हराएंगे।” शुक्रवार, 26 जून को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने ‘नशा मुक्त भारत’ के लिए 2026–2029 का विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इस वक्त नशे के खिलाफ जंग के एक अहम पड़ाव पर खड़ा है, और आने वाले तीन साल पूरी लड़ाई की दिशा तय करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत के साथ-साथ नशा मुक्त भारत का भी लक्ष्य रखा है, और यह रोडमैप देश के युवाओं को नशे से दूर रखने की दिशा में एक ठोस कदम है।
बैठक में क्या-क्या हुआ

इस मौके पर गृह मंत्री ने NCB की वार्षिक रिपोर्ट-2025 भी जारी की और जम्मू तथा गुवाहाटी में NCB के नए ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन किया। साथ ही उन्होंने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोजल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत की, जिसके तहत करीब 2,09,500 किलो नशीले पदार्थ जिनकी कीमत लगभग 6,000 करोड़ रुपये है कानूनी प्रक्रिया के तहत नष्ट किए जाएंगे।
बैठक में 44 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के अलावा राज्य सरकारों तथा ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसियों के 108 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक हाइब्रिड मोड में हुई, ताकि पूरे देश से जुड़ी एजेंसियाँ एक मंच पर आ सकें और तालमेल बेहतर हो।
चार स्तंभों पर टिका रोडमैप
शाह ने बताया कि 2026 से 2029 तक का यह रोडमैप चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है — एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस और ऑपरेशंस; प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण; डिमांड और हार्म रिडक्शन; तथा क्षमता निर्माण, समन्वय और निगरानी। यह दस्तावेज़ सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के ज़रिए होने वाली तस्करी जैसी नई चुनौतियों से निपटने पर खास फोकस करता है। इसके साथ ही नशे के आदी लोगों के लिए इलाज और पुनर्वास केंद्रों का दायरा बढ़ाने और जन-जागरूकता पर भी जोर दिया गया है।
गृह मंत्री ने आँकड़ों के ज़रिए सरकार की कार्रवाई का हिसाब भी दिया। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच जहाँ करीब 40,000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ ज़ब्त हुए थे, वहीं 2014 से 2026 के बीच यह आँकड़ा 1,84,000 करोड़ रुपये (लगभग 1 करोड़ 18 लाख किलो) तक पहुँच गया। इसी तरह, इस दौरान 89,896 करोड़ रुपये मूल्य के ड्रग्स नष्ट किए गए, जबकि 2004–2014 में यह सिर्फ 8,000 करोड़ रुपये था।
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अवैध खेती पर कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020 में जहाँ 10,000 एकड़ अवैध अफीम की फसल नष्ट की गई थी, वहीं 2025 में 42,282 एकड़ फसल नष्ट की गई। मामलों और गिरफ्तारियों के मोर्चे पर भी तेजी आई — 2004 से 2014 के बीच जहाँ 1,73,000 मामले दर्ज हुए और 1,95,000 गिरफ्तारियाँ हुईं, वहीं 2014 से 2026 के बीच 8,75,000 से ज़्यादा मामले दर्ज हुए और 10,97,000 लोग गिरफ्तार किए गए।
शाह ने राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों से अपील की कि वे NCORD की बैठकों को सिर्फ औपचारिकता न बनाकर नतीजे देने वाली बनाएं। उन्होंने ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ यानी पूरी सरकार के साझा प्रयास की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
बता दें कि…
बता दें कि NCORD केंद्र और राज्यों के बीच नशे के खिलाफ तालमेल बिठाने वाला मुख्य ढाँचा है। अब तक देशभर में 15,876 जिला स्तरीय, 266 राज्य स्तरीय और 7 कार्यकारी समिति की बैठकें हो चुकी हैं, और शुक्रवार की बैठक शीर्ष स्तर की 10वीं बैठक थी। सरकार लगातार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर चलने की बात कहती रही है, खासकर पंजाब और सीमावर्ती राज्यों में बढ़ती नशे की तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मानते हुए। अब इस नए विज़न डॉक्यूमेंट के साथ सरकार ने अगले तीन साल के लिए साफ ज़िम्मेदारियाँ, समयसीमा और मापने लायक लक्ष्य तय कर दिए हैं।
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